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यूपी की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत ओबरा में दलालों का जाल, PMAY लाभार्थियों से घर-घर जाकर हो रही लूट
लोगों ने किया जिला प्रसाशन से संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की मांग, जनप्रतिनिधि बेखबर
अजित सिंह ( ब्यूरो रिपोर्ट ) के साथ कैमरामैन कु. रीता
ओबरा /सोनभद्र-
ओबरा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ जीरो टॉलरेंस के तहत भ्रष्टाचार मिटाने और गरीबों को सस्ता निर्माण मटीरियल देने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र की ओबरा नगर पंचायत (जो प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत मानी जाती है) में दलाल तंत्र ने सरकार की साख पर बट्टा लगा दिया है। यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लाभार्थियों की गाढ़ी कमाई पर दलाल दीमक की तरह लग गए हैं।

अब दलाल केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि बिल्ली गांव, बलुआ टोला, नई कॉलोनी, वार्ड नंबर 1 और वार्ड नंबर 3 जैसे क्षेत्रों में सीधे गरीबों के दरवाजों पर दस्तक दे रहे हैं। दलाल घर-घर जाकर लाभार्थियों से पूछते हैं कि बालू-गिट्टी चाहिए? पूछने पर उन्हें झूठे आंकड़ों में फंसाया जाता है और सप्लाई बंद होने वाली है जैसी अफवाह फैलाकर उन्हें डराया जाता है। जिस बालू का सरकारी रेट ₹2000 के आसपास होना चाहिए, उसे ये दलाल फुसलाकर ₹2200 से ₹2300 में जबरन गिरा रहे हैं।
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अब दीवारें तो खड़ी हो गई हैं, पर छत डालने की हिम्मत नहीं जुट रही। क्या हम आवास बनाएं या दलालों का पेट भरें? उत्तर प्रदेश की इतनी बड़ी नगर पंचायत में खुलेआम चल रही इस कालाबाजारी ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जनता पूछ रही है । मुख्यमंत्री के आदेशों के बावजूद इन बिचौलियों पर कठोर विधिक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?ओबरा अब विकास के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। यदि प्रशासन ने तुरंत गैंगस्टर एक्ट जैसी कार्रवाई नहीं की और खनन साइटों पर सीधी निगरानी के लिए पारदर्शी पोर्टल या हेल्पलाइन शुरू नहीं की, तो प्रदेश की इस प्रतिष्ठित नगर पंचायत में गरीबों के मकान केवल अधूरे ढांचे बनकर रह जाएंगे।

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