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दिल्ली पुलिस सप्ताह 2026: ऑप्स विश्वास 2.0 सुरक्षित नागरिक, सुरक्षित साइबर स्पेस
नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस सप्ताह 2026 के अंतर्गत साउदर्न रेंज द्वारा एनसीयूआई ऑडिटोरियम, हौज खास में ऑप्स विश्वास 2.0 के तहत एक व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। “सेवा, संवेदनशीलता और साझा जिम्मेदारी” की भावना से प्रेरित इस कार्यक्रम ने नागरिक सेवा, डिजिटल सुरक्षा और सामुदायिक सहभागिता के प्रति दिल्ली पुलिस की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन वापस करना नहीं था, बल्कि डिजिटल युग में नागरिकों को जागरूक और सुरक्षित बनाना भी था ऑप्स विश्वास 2.0 के अंतर्गत 1,000 से अधिक खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन उन्नत तकनीकी निगरानी, डिजिटल विश्लेषण तथा सतत फील्ड प्रयासों के माध्यम से सफलतापूर्वक ट्रेस कर उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए।
इससे पहले दिसंबर 2025 में ऑपरेशन विश्वास 1.0 के तहत भी लगभग 1,000 मोबाइल फोन लौटाए गए थे। प्रत्येक मोबाइल की वापसी केवल एक वस्तु की बरामदगी नहीं थी, बल्कि यह नागरिकों के आत्मविश्वास, सम्मान और मानसिक शांति की पुनर्स्थापना का प्रतीक थी। यह अभियान इस बात का उदाहरण बना कि तकनीक-सक्षम और संवेदनशील पुलिसिंग कैसे जनविश्वास को मजबूत कर सकती है।
कार्यक्रम की शुरुआत दक्षिण जिला के डीसीपी अंकित चौहान, आईपीएस के स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों और समय पर शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता पर बल दिया। साइबर विशेषज्ञ श्री ईशान सिन्हा ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, निवेश एवं पोंजी स्कीम, नौकरी से संबंधित ठगी, ऑनलाइन प्रतिरूपण और फिशिंग जैसे साइबर अपराधों के विषय में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने सरल भाषा में नागरिकों को सतर्क रहने के उपाय बताए तथा हेल्पलाइन और शिकायत तंत्र की जानकारी साझा की, जिससे लोग संभावित वित्तीय नुकसान से बच सकें कार्यक्रम की अध्यक्षता विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था, जोन-II, मधुप तिवारी, आईपीएस ने की। उन्होंने स्वयं नागरिकों को बरामद मोबाइल फोन सौंपे और अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल युग में सुरक्षा के लिए जागरूकता, अनुशासन और नागरिक-पुलिस सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर अपराधी भय और लालच का लाभ उठाते हैं, और केवल जागरूक एवं सतर्क नागरिक ही ऐसे अपराधों को प्रभावी रूप से विफल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ऑप्स विश्वास 2.0 केवल एक रिकवरी अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक से किए गए वादे की पुनर्पुष्टि है, जिसमें जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है।कार्यक्रम में संयुक्त पुलिस आयुक्त (साउदर्न रेंज) श्री एस.के. जैन, दक्षिण-पूर्व जिला के डीसीपी डॉ. हेमंत तिवारी, अतिरिक्त डीसीपी सुश्री ऐश्वर्या शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि साइबर अपराध से निपटने में जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता सबसे प्रभावी साधन हैं। कार्यक्रम के दौरान एक प्रभावशाली और शिक्षाप्रद नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया, जिसमें जटिल साइबर खतरों को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इस प्रस्तुति ने विभिन्न आयु वर्ग के लोगों तक संदेश को सहज रूप में पहुँचाया और व्यापक सराहना प्राप्त की।मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व के सम्मान स्वरूप कार्यक्रम में गुड समैरिटन को सम्मानित किया गया। साथ ही 20 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों, आरडब्ल्यूए सदस्यों और प्रहरियों को भी सम्मान प्रदान किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उत्कृष्टता, पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना को सुदृढ़ किया गया।
कार्यक्रम में 400 से अधिक नागरिकों की उपस्थिति ने यह दर्शाया कि जनता और पुलिस के बीच विश्वास और सहयोग निरंतर मजबूत हो रहा है।दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण केवल कानून प्रवर्तन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक साझा सामाजिक दायित्व है। सतर्क नागरिक, उत्तरदायी पुलिसिंग और सक्रिय सामुदायिक सहभागिता मिलकर ही सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ बना सकते हैं। नागरिकों से अपील की गई कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना अपने निकटतम पुलिस थाने को दें या 112 नंबर पर संपर्क करें। वित्तीय साइबर ठगी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर सुरक्षा के संदर्भ में नागरिकों को सलाह दी गई कि किसी भी उच्च लाभ वाले निवेश प्रस्ताव पर बिना सत्यापन विश्वास न करें, ओटीपी या केवाईसी विवरण साझा न करें, अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें तथा खोए या चोरी हुए मोबाइल को तुरंत ब्लॉक या ट्रेस कराएं। डिजिटल अरेस्ट जैसी अवधारणाओं से सावधान रहें, क्योंकि कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।ऑप्स विश्वास 2.0 ने यह सिद्ध कर दिया कि जब पुलिस और जनता कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करती है, तो सुरक्षा केवल एक नारा नहीं बल्कि वास्तविकता बन जाती है। सड़कों पर सतर्कता और डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी—इन्हीं दोनों के संतुलन से एक सुरक्षित, सशक्त और जागरूक दिल्ली का निर्माण संभव है।

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