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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पत्र ने खुद खोली राज्य शिक्षक पुरस्कार चयन के प्रक्रिया की पोल
जिस अध्यापक को मिला राज्य पुरस्कार , उसी स्कूल का निपुण प्लस ऐप पर आकलन रिपोर्ट शून्यबहादुरपुर विकास खण्ड के अगई भगाड़ स्कूल व राजीव उपाध्याय से जुड़ा मामला
बस्ती। बस्ती जिले में राज्य शिक्षक पुरस्कार चयन की प्रक्रिया विभागीय खामियों के चलते अक्सर सवालों के घेरे में रहती है। मामला तब और बिगड़ जाता है जब कोई विभागीय व जिम्मेदार अधिकारी उसी विद्यालय की खामियाँ उजागर करना शुरु कर दे जिस विद्यालय का अध्यापक राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित हुआ हो और वह भी क्षणिक समयान्तराल में और पुरस्कार प्राप्ति को एक भी सत्र न बीता हो।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद के बहादुरपुर विकास खण्ड के अन्तर्गत स्थित प्राथमिक विद्यालय अगई भगाड़ के प्रधानाध्यापक राजीव उपाध्याय अभी इसी सत्र में राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित हुए हैं और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निपुण प्लस ऐप पर उनके विद्यालय के बच्चों का आकलन रिपोर्ट शून्य पाते हुए चेतावनी पत्र जारी करते हुए अनजाने में ही सही राज्य शिक्षक पुरस्कार चयन प्रक्रिया की पोल खोल दी।
राज्य शिक्षक पुरस्कारों के चयन हेतु शिक्षको व विद्यालयों का विभिन्न मापदंडों पर परीक्षण किया जाता है और सभी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही उस सम्बन्धित शिक्षक का नाम प्रस्तावित होता है परन्तु बस्ती जनपद में राज्य शिक्षक पुरस्कार चयन प्रक्रिया शुरू से ही विवादों से घिरी रही लेकिन तत्समय जिम्मेदारों की मनमानी नियमों पर भारी पड़ी व शिकायतों को नजरंदाज करते हुए चहेतों को लाभ दिलाने में जिम्मेदार सफल भी हो गए ।
निपुण प्लस ऐप पर चल रहे आकलन ने जिम्मेदारों की पोल इस कदर खोली कि जिम्मेदार न तो हँस पर रहे न रो पा रहे । प्रश्न यह उठता है कि निपुण प्लस जैसे सामान्य आकलन में जब राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक के विद्यालय अगई भगाड़ की प्रगति शून्य पायी गयी तो विभाग ने अन्य मापदंडों पर विद्यालय को कैसे चयन के समय सही व सटीक पाया था , कहीं ऐसा तो नहीं कि जनपद में जुगाड़ के सामने प्रतिभाएं दबा दी गयीं और पात्र पुरस्कारों से वंचित रह गए ।

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