बेलवनिया–शास्त्रीनगर पुल DPR पर उठे सवाल

मंत्रालय की अनुमति से पहले तैयारी पर बड़ा प्रश्नचिह्न

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कुशीनगर।  पश्चिम चंपारण में गंडक नदी पर प्रस्तावित बगहा (शास्त्रीनगर)–बेलवनिया 4-लेन पुल परियोजना को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग द्वारा यह जानकारी दी गई कि पुल के लिए DPR तैयार कर केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को स्वीकृति हेतु भेजा गया है, लेकिन इसी प्रक्रिया पर अब सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब परियोजना को अभी तक मंत्रालय की स्वीकृति नहीं मिली है, तो बिना अनुमति DPR तैयार कैसे कर लिया गया। लोगों के अनुसार DPR तैयार होना यह संकेत देता है कि परियोजना पहले से स्वीकृत प्रक्रिया में होनी चाहिए थी, जबकि विभाग अब कह रहा है कि स्वीकृति के बाद ही निर्माण की अगली कार्रवाई होगी।
इस मुद्दे को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि DPR पहले ही तैयार है, तो अब मंत्रालय से किस प्रकार की अनुमति अपेक्षित है—क्या यह तकनीकी स्वीकृति है, वित्तीय स्वीकृति है या प्रशासनिक मंजूरी। यह स्थिति पूरे मामले को और अधिक जटिल बना रही है।
उधर, विभाग का पक्ष है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में DPR तैयार कर केंद्र सरकार को भेजना एक सामान्य प्रक्रिया है और अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्यारंभ होता है। लेकिन जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनता के बीच यह स्पष्ट नहीं किया गया कि परियोजना किस चरण में है, जिससे भ्रम और आक्रोश की स्थिति बन रही है।
गौरतलब है कि यह प्रस्तावित पुल पश्चिम चंपारण और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर क्षेत्र के बीच आवागमन का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है और इसके निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। ऐसे में परियोजना को लेकर अस्पष्टता और प्रक्रियागत सवालों ने इसे एक बड़ा जन मुद्दा बना दिया है।

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