ओबरा रात के अंधेरे में सड़क नवीनीकरण पर जनता का पहरा भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए रुकवाया काम

ओबरा हनुमान मन्दिर से बजरंग नगर मुख्य मार्ग विवादों के घेरे में, नवीनीकरण के नाम पर लाखों की लूट

अजित सिंह / राजेश तिवारी Picture
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अजित सिंह की रिपोर्ट के साथ कैमरामैन कु. रीता

ओबरा /सोनभद्र-

ओबरा नगर के ओबरा हनुमान मंदिर से बजरंग नगर मुख्य मार्ग पर लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सोमवार की देर रात लगभग 11 बजे गुपचुप तरीके से शुरू किए गए सड़क नवीनीकरण कार्य को स्थानीय नागरिकों ने न केवल रोका, बल्कि विभाग की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से सड़क की पटरियों से धूल और कंक्रीट हटाने का काम चल रहा था। नगरवासियों को लगा कि महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में नगर की सफाई की जा रही है।

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लेकिन 16 फरवरी की रात जब भारी मशीनरी और तारकोल बिछाने की तैयारी शुरू हुई, तो मामला सफाई से बदलकर सड़क नवीनीकरण का निकला।मौके पर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की मौजूदगी में नागरिकों ने तीखी बहस की और निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब मांगा। स्थानीय लोगों का तर्क है कि सड़क की मौजूदा हालत काफी अच्छी थी। ऐसे में बिना किसी तकनीकी खराबी के दोबारा डामरीकरण करने की क्या आवश्यकता थी ।क्या इसका कोई कंडीशन सर्वे सार्वजनिक किया गया। नियमतः किसी भी सरकारी कार्य के शुरू होने से पहले उसकी लागत, लंबाई और कार्यदायी संस्था का विवरण देने वाला सूचना पट्ट (Work Board) लगाना अनिवार्य है, जो मौके पर नदारद था।

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रात के अंधेरे में चल रहे काम के दौरान बैरिकेडिंग या रिफ्लेक्टर जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं किया गया था, जिससे राहगीरों की जान को खतरा हो सकता था। मौके पर मौजूद श्रमिकों के सुरक्षा उपकरण और श्रम कानूनों के अनुपालन को लेकर भी विभाग के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्य 6 माह पूर्व स्वीकृत हुआ था और टेंडर 2 माह पहले आवंटित हो चुका था। हालांकि, रात में कार्य शुरू करने की जल्दबाजी पर अधिकारी जनता को संतुष्ट नहीं कर सके। जब सड़क पहले से ही चलने लायक है, तो सरकारी धन का दुरुपयोग क्यों? रात के 11 बजे ही काम शुरू करना पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

नागरिकों के भारी विरोध और हंगामे के चलते कार्य को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि जब तक विभाग कार्य की लागत, तकनीकी आधार और गुणवत्ता मानकों का विवरण सार्वजनिक नहीं करता, तब तक एक इंच भी काम आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा। अब इस मामले में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। क्या उच्चाधिकारी इस कार्य की तकनीकी जांच कराएंगे या फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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