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सोनभद्र समर्पण दिवस पर याद किए गए पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अंत्योदय के संकल्प को दोहराया
विचारों को आत्मसात करना ही सच्ची श्रद्धांजलि डॉ. धर्मवीर तिवारी
अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह, रॉबर्ट्सगंज भारतीय राजनीति के पुरोधा और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि बुधवार को रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में समर्पण दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके आदर्शों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉक्टर धर्मवीर तिवारी ने पंडित जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का उदाहरण है। उनकी पुण्यतिथि केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने आचरण में उतारने और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान का संकल्प लेने का दिन है। डॉ. तिवारी ने वर्तमान भारत की नीतियों को पंडित जी के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि आज का आत्मनिर्भर भारत अभियान वास्तव में गांवों के गरीबों, किसानों और मजदूरों के भविष्य को संवारने का माध्यम बन रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वोकल फॉर लोकल का मंत्र दीनदयाल जी के स्थानीय अर्थव्यवस्था के विजन को धरातल पर उतार रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस प्रकार कोविड-19 के संकट काल में भारत ने न केवल खुद को संभाला बल्कि विश्व को टीके मुहैया कराए, वह पंडित जी के समग्र मानवतावाद के दर्शन की वैश्विक जीत है। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने पंडित जी के अंत्योदय (पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का उदय) के सिद्धांत पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने समाज में समरसता और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से सभासद विनोद सोनी, अखिलेश कश्यप, राहुल, सत्यम, संजय, रवि, राजू, रोहित, विशाल सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र सेवा के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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