एनसीपी गुटों का विलय रद्दः विधायकों के बयान पर रोक

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ब्यूरो प्रयागराज। महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एनसीपी (अजित पवार) ने विधायकों के बयान देने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ विलय की बातचीत फिलहाल खत्म हो गई है। सुनेत्रा पवार को 26 फरवरी को अगला अध्यक्ष चुना जा सकता है।

एनसीपी गुटों के विलय की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों पर सख्त 'गैग ऑर्डर' (मौन आदेश) जारी कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों एनसीपी गुटों का विलय संभव नहीं है। कहा जा रहा है कि कुछ विधायक विलय की ज़ोरदार वकालत कर रहे हैं। विलय न होने की स्थिति में कुछ विधायक बीजेपी में जा सकते हैं।

यह निर्देश सोमवार को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के आधिकारिक निवास 'देवगिरि' में विधायकों की बैठक में जारी किया गया। बैठक में पार्टी ने यह भी औपचारिक रूप से तय किया कि दिवंगत पार्टी प्रमुख अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को अगला एनसीपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा। अजित पवार की 28 जनवरी को एक विमान हादसे में मौत हो गई थी।

कोर कमेटी की बैठक में सभी विधायकों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने बाद में बताया कि चुनाव 26 फरवरी को मुंबई में होगा और सुनेत्रा पवार के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।

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विधायकों पर लगाए गए मौन आदेश के बारे में पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व यह जानना चाहता है कि कुछ विधायकों द्वारा एनसीपी (एसपी) के साथ विलय की मांग क्यों की जा रही है। क्या यह बाहरी प्रभावों से प्रेरित है या विधायकों की अपनी मान्यता है कि विलय से उनके क्षेत्रों में स्थिति मजबूत होगी? हाल ही में इस बात के संकेत मिले थे कि अगर विलय नहीं होता है तो कुछ विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

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