अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में यौन शोषण का आरोप: पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर!
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट से निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रयागराज: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम/शिविर को लेकर गंभीर और संवेदनशील आरोप सामने आए हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के साथ यौन शोषण करने और गुरुकुल के नाम पर बाल उत्पीड़न जैसी गंभीर गतिविधियां संचालित करने का आरोप लगाया है। (Rewa Riyasat)
📌 याचिका में क्या दावा है?
• आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि गुरुकुल के नाम पर चल रहे शिविर में बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार होता रहा है।
• याचिका में आरोपों की पुष्टिकरण के लिए दो बच्चों को भी कोर्ट में पेश किया गया है।
• याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के पास उनकी आय से कहीं अधिक संपत्ति है, और इसी कारण मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। (Bansal News)
📌 कोर्ट की प्रतिक्रिया:
• स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने याचिका पर दोनों पक्षों से जवाब मांगा है।
• बताया जा रहा है कि अविमुक्तेश्वरानंद के वकील या प्रतिनिधि ने अदालत में अपने पक्ष का जवाब पहले ही दर्ज करा दिया है।
• अगली सुनवाई 20 फरवरी को होने की संभावना है। (punjabkasach.com)
📌 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब:
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद या उनके प्रतिनिधियों ने अदालत में आरोपों को बेबुनियाद बताया है और इन दावों को न्यायालय में जवाब दे दिया है। हालांकि, इस तरह की आधिकारिक सफाई का विस्तृत बयान सार्वजनिक रूप से नहीं आया है। (punjabkasach.com)
📌 मामले का कानूनी संदर्भ:
• यह मामला पीओसीसो (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट की दायर की गई याचिका के रूप में दर्ज हुआ है, जो बच्चों के प्रति यौन अपराधों के लिए खास कानून है।
• अदालत इस याचिका पर जांच के निर्देश, एफआईआर दर्ज कराने या अन्य आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है। (Rewa Riyasat)
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• इस मामले पर सार्वजनिक बहस और चर्चाएँ बढ़ रही हैं।
• समर्थक और विरोधी दोनों तरफ के ग्रुप अपने-अपने बयानों के साथ सामने आ रहे हैं, लेकिन आधिकारिक पुलिस जांच या एफआईआर की जानकारी अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। (punjabkasach.com)
🔎 स्थिति स्पष्ट नहीं — अभी तक पुलिस ने कोई FIR (First Information Report) दर्ज करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं दी है, और यह मामला अदालत में प्रगतिशील प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है। कोर्ट का अगला दिन (20 फरवरी) महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। (Rewa Riyasat)

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