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‘हम राजेश सिंह हई, अखियां निकाल लेईब’… मऊ में वायरल वीडियो से गरमाया विवाद, कानपुर केस से हो रही तुलना
कानपुर के आस्था सिंह मामले से हो रही तुलना
मऊ।
वायरल वीडियो में पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह कथित तौर पर आरपीएफ जवान को धमकाते हुए कहते नजर आ रहे हैं—
“हम राजेश सिंह हई… अखियां निकाल लेईब… हम सिंह हई, औकात में रहो।”
इस दौरान वह जवान के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल करते भी दिखाई दे रहे हैं।
मऊ रेलवे स्टेशन पर हुई नोंकझोंक
जानकारी के अनुसार, यह वीडियो मऊ रेलवे स्टेशन का है, जहां पार्सल अधीक्षक और आरपीएफ जवान के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते मामला तू-तू, मैं-मैं और बदसलूकी तक पहुंच गया, जिसका वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया।
वीडियो वायरल होते ही लोग इस घटना की तुलना हाल ही में सामने आए कानपुर के एचडीएफसी बैंक विवाद से करने लगे हैं।
बिलासपुर में तैनात हैं आरपीएफ जवान
बताया जा रहा है कि आरपीएफ जवान अमित कुमार यादव छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित उलसा में तैनात हैं। वह अपने घर मऊ जिले के घोसी आए हुए थे और बिलासपुर से आए पार्सल को लेने रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। इसी दौरान पार्सल अधीक्षक से उनका विवाद हो गया, जो बाद में बढ़ गया।
कानपुर के आस्था सिंह मामले से हो रही तुलना
इस घटना को कानपुर के एचडीएफसी बैंक कर्मचारी आस्था सिंह विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ समय पहले कानपुर के पनकी स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें रिलेशनशिप मैनेजर आस्था सिंह एक व्यक्ति से बहस करते हुए “ठाकुर हूं, ऐसी-तैसी कर दूंगी” कहते हुए नजर आई थीं।
इस वीडियो के बाद जातिगत टिप्पणी और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
आस्था सिंह ने दी थी सफाई
विवाद के बाद आस्था सिंह ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनका विवाद किसी ग्राहक से नहीं, बल्कि एक महिला संविदा कर्मचारी के पति से हुआ था, जिसने पहले उनसे जाति पूछकर अभद्रता की थी।
उन्होंने कहा था कि गुस्से में कुछ शब्द गलत हो सकते हैं, लेकिन धमकी और अपमानजनक भाषा सहना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वीडियो को गलत संदर्भ में वायरल किया गया।
सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया
मऊ के इस नए वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सार्वजनिक पदों पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। कई यूजर्स ने इसे “घमंड और सत्ता के दुरुपयोग” से जोड़ते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में रेलवे प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, वीडियो के वायरल होने के बाद विभागीय जांच की संभावना जताई जा रही है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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