कॉल स्पूफिंग: साइबर ठगों का खतरनाक हथियार, जो आपकी जेब पर डाका डाल सकता है वेद सिंह 

इन साइबर तो से रहे सावधान किसी भी स्थिति में 1930 डायल करें तुरंत सहायता मिलेगी 

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बरेली /डिजिटल के दौर में फोन उठाना भी जोखिम भरा हुआ है। एक तरफ जहां हम रिश्तेदारों, दोस्तों और जरूरी कामों के लिए मोबाइल पर निर्भर हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधी इसी मोबाइल को हथियार बनाकर लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक तरीका है कॉल स्पूफिंग। यह तकनीक इतनी सटीक है कि स्क्रीन पर दिखने वाला नंबर बिल्कुल असली लगता है, लेकिन असल में कॉल करने वाला कोई और होता है।
 
कॉल स्पूफिंग क्या होती है?
सरल शब्दों में कहें तो कॉल स्पूफिंग में ठग आपके फोन की स्क्रीन पर जो नंबर या नाम दिखाते हैं, वह वे खुद चुनते हैं। वे VoIP (इंटरनेट के जरिए कॉलिंग) ऐप्स या स्पेशल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके किसी बैंक, पुलिस, CBI, RBI, आपके रिश्तेदार या यहां तक कि किसी सरकारी कार्यालय के नंबर को स्पूफ कर देते हैं। मतलब, आपके फोन पर दिखता है कि कॉल बैंक से आ रही है या पुलिस स्टेशन से, लेकिन असल में वह कोई साइबर ठग बैठा होता है, जो शायद विदेश में या किसी छिपे हुए ठिकाने पर है।
 
भारत में यह तरीका पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से फैला है। खासकर 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में इसका जमकर इस्तेमाल हो रहा है। ठग खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताते हैं, कहते हैं कि आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में आया है। वे डराते-धमकाते हैं, वीडियो कॉल पर रखते हैं और कहते हैं कि 'डिजिटल गिरफ्तारी' हो गई है। घबराए लोग लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर देते हैं।2025 में ही भारत में साइबर फ्रॉड से लोगों ने 19,000 करोड़ से ज्यादा रुपये गंवाए, जिसमें स्पूफिंग का बड़ा हाथ था।
 
ठग कैसे काम करते हैं और क्यों सफल होते हैं 
ये लोग विदेशी सर्वर, अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज और AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। सरकार ने 2025 में CIOR सिस्टम लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्पूफ्ड कॉल्स को 97% तक कम किया लेकिन ठग अब नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं। 
कभी लोकल नंबर स्पूफ करते हैं, कभी बैंक का। वे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं – डर, लालच या इमोशनल ब्लैकमेल।
 
सावधानी ही बचाव है ये मूलमंत्र सदैव याद रखिये
किसी भी कॉल में पैसे, OTP, CVV, पासवर्ड या पर्सनल डिटेल कभी न दें।  
अगर कोई अधिकारी बनकर धमकी दे तो कॉल काटें और खुद संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से संपर्क करें।  
संदिग्ध कॉल आए तो दोबारा उसी व्यक्ति को उसके ज्ञात नंबर से कॉल करके सत्यापन करें। 
फोन में ट्रू कॉलर या सरकारी ऐप्स जैसे 'चेक कॉलर' का इस्तेमाल करें।  
संदेह हो तो 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर शिकायत करें।  
बैंक या सरकारी एजेंसी कभी फोन पर पैसे मांगती नहीं।
 
याद रखिए, साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार आपका डर है। जरा सी सतर्कता से आप न सिर्फ अपनी, बल्कि परिवार की जमा-पूंजी बचा सकते हैं। सरकार और पुलिस प्रयासरत हैं, लेकिन असली जिम्मेदारी हमारी है। सावधान रहें, सुरक्षित रहें। क्योंकि एक कॉल आपकी पूरी मेहनत की कमाई छीन सकती है! साइबर क्राइम से संबंधित प्रतिदिन अधिक जानकारी के लिए चैनल को ज्वॉइन करें । अधिक से अधिक लोगों को शेयर करें और अधिक से अधिक लोगों को चैनल में जोड़े जिससे हम अधिक से अधिक लोगों को जागरुक कर सकें और साइबर अपराध से बचा सकेंl
 

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