राजनीति
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत, जयशंकर ने कोमोरोस के विदेश मंत्री से की अहम मुलाकात
भारत और कोमोरोस के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क पर सहमति
International Desk
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि कोमोरोस के विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने के महत्व पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यह बातचीत भारत–कोमोरोस संबंधों को नई दिशा देने वाली है।
कोमोरोस के विदेश मंत्री म्बाए मोहम्मद दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं, जो शनिवार को आयोजित होने वाली है। इस संदर्भ में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कोमोरोस के विदेश मंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
Read More सीडीओ ने कृषकों की फार्मर रजिस्ट्री कराने हेतु प्रचार प्रसार वाहन को हरी झण्डी दिखाकर किया रवानाविदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने वर्ष 1976 में कोमोरोस के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। मेडागास्कर की राजधानी अंतानानारिवो स्थित भारतीय दूतावास को कोमोरोस के लिए भी मान्यता प्राप्त है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से घनिष्ठ और मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं और क्षेत्रीय व बहुपक्षीय मंचों पर कई मुद्दों पर दोनों के विचार समान हैं।
कोमोरोस वर्ष 2012 से हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) और 2017 से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का सदस्य है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। कोमोरोस में लगभग 250 भारतीय नागरिक रहते हैं, जो व्यापार, व्यवसाय और विभिन्न पेशों में सक्रिय हैं और देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान दे रहे हैं।
Read More स्वास्थ्य विभाग एवं गिफ्टएबल्ड फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजितगौरतलब है कि भारत दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (IAFMM) की मेजबानी कर रहा है, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी शामिल होंगे। यह बैठक करीब 10 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले पहली भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक वर्ष 2016 में बहरीन में आयोजित की गई थी।
पहली बैठक में अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति को सहयोग के पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। अब दूसरी बैठक से इन क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत की हिंद महासागर क्षेत्र में भूमिका और प्रभाव दोनों मजबूत होंगे।

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