गगनयान से गूंजता भारतअंतरिक्ष में आत्मनिर्भर राष्ट्र का उदय

भारत आज इतिहास के उस मोड़ पर खड़ा है जहां उसका आत्मविश्वास आकाश से भी ऊंचा दिखाई देता है

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भारत आज इतिहास के उस मोड़ पर खड़ा है जहां उसका आत्मविश्वास आकाश से भी ऊंचा दिखाई देता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा गगनयान मिशन की तैयारियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब केवल सपने देखने वाला देश नहीं रहा बल्कि उन्हें साकार करने की क्षमता भी रखता है। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है और इससे पहले प्रस्तावित मानवरहित मिशन भारत की वैज्ञानिक सोच अनुशासन और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। इसरो अध्यक्ष द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि गगनयान कार्यक्रम की शुरुआत 2027 से होगी और उससे पहले तीन मानवरहित मिशन पूरे किए जाएंगे।

यह रणनीति बताती है कि भारत किसी भी सफलता को जल्दबाजी में नहीं बल्कि ठोस तैयारी और कठोर परीक्षण के बाद ही हासिल करना चाहता है। अंतरिक्ष यात्रा में मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि होती है और भारत इस जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से समझता है। मानवरहित गगनयान मिशन भारत की पहली प्राथमिकता है क्योंकि यह पूरे कार्यक्रम की नींव है। इसमें प्रयुक्त हर प्रणाली हर तकनीक और हर यंत्र की गुणवत्ता की गहन जांच की जा रही है। रॉकेट प्रणाली हो या कैप्सूल नियंत्रण तंत्र हो या पुनः प्रवेश प्रणाली हर स्तर पर शत प्रतिशत सफलता का लक्ष्य रखा गया है।

यह भारतीय वैज्ञानिकों की परिपक्वता और वैश्विक मानकों के अनुरूप सोच को दर्शाता है। गगनयान का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष में मानव भेजना नहीं है बल्कि यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। तीन सदस्यीय दल को तीन दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना अत्यंत जटिल कार्य है। इस चुनौती को स्वीकार करना ही यह साबित करता है कि भारत अब उन देशों की पंक्ति में खड़ा है जो अंतरिक्ष विज्ञान में नेतृत्व कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।

चंद्रयान मिशन से लेकर मंगल अभियान तक भारत ने कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इन उपलब्धियों ने यह धारणा तोड़ दी है कि केवल विकसित देश ही अंतरिक्ष में सफलता पा सकते हैं। भारत ने यह सिद्ध किया है कि संकल्प और वैज्ञानिक दृष्टि हो तो सीमित संसाधनों में भी असाधारण परिणाम संभव हैं। गगनयान मिशन उसी निरंतर प्रगति की अगली कड़ी है। यह केवल एक वैज्ञानिक परियोजना नहीं बल्कि राष्ट्रीय आत्मसम्मान का विषय है। आज जब भारत अमृत काल में प्रवेश कर चुका है तब अंतरिक्ष में मानव भेजना देश की नई पहचान गढ़ने वाला कदम है।

यह युवा पीढ़ी को विज्ञान अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित करेगा और देश में वैज्ञानिक सोच को और मजबूत करेगा। दुनिया आज भारत को नए दृष्टिकोण से देख रही है। भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति तकनीकी क्षमता और कूटनीतिक संतुलन ने उसे वैश्विक मंच पर एक निर्णायक भूमिका में ला खड़ा किया है। अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता ने इस साख को और मजबूत किया है। यही कारण है कि कुछ विकसित देश भारत की इस तेज प्रगति से असहज महसूस कर रहे हैं।

भारत को कमतर आंकने के प्रयास किए जाते हैं लेकिन हर सफल मिशन उन प्रयासों को निष्फल कर देता है। स्वतंत्रता के बाद के भारत और पिछले बारह वर्षों के भारत की तुलना की जाए तो अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। आज भारत आत्मनिर्भरता की राह पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है। रक्षा उत्पादन अंतरिक्ष तकनीक डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे में भारत ने जो प्रगति की है वह अभूतपूर्व है। गगनयान मिशन इसी विकास यात्रा का प्रतीक है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल एक नारा नहीं है बल्कि एक सुविचारित योजना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी इसमें केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत को संचार मौसम पूर्वानुमान आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। मानव अंतरिक्ष मिशन भारत को अनुसंधान नवाचार और वैश्विक सहयोग के नए अवसर प्रदान करेगा।गगनयान के मानवरहित मिशन यह सुनिश्चित करेंगे कि जब भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजे तब हर प्रणाली पूर्ण रूप से विश्वसनीय हो। यह धैर्य और अनुशासन भारत की कार्य संस्कृति को दर्शाता है। भारत दिखावे की नहीं बल्कि स्थायी सफलता की राह पर चलने वाला राष्ट्र है।

आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। अंतरिक्ष की सफलताओं ने यह साबित कर दिया है कि भारत किसी से पीछे नहीं है। युवा वैज्ञानिकों की मेहनत अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और राष्ट्रीय नेतृत्व की स्पष्ट दृष्टि ने भारत को इस मुकाम तक पहुंचाया है।भविष्य में गगनयान केवल एक मिशन नहीं रहेगा बल्कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा का आधार बनेगा। इससे आगे चलकर अंतरिक्ष स्टेशन गहरे अंतरिक्ष मिशन और वैश्विक साझेदारियां संभव होंगी। भारत ज्ञान विज्ञान और मानवता के हित में अंतरिक्ष का उपयोग करने वाला अग्रणी राष्ट्र बनेगा।गगनयान की तैयारी यह संदेश देती है कि भारत सुरक्षित साहसी और दूरदर्शी है। यह राष्ट्र चुनौतियों से डरता नहीं बल्कि उन्हें अवसर में बदलता है। आने वाला समय भारत का है और अंतरिक्ष में गूंजता गगनयान उसी उज्ज्वल भविष्य की उद्घोषणा है।

कांतिलाल मांडोत


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