Hindi lekh

नीतीश कुमार होना आसान नहीं है

महेन्द्र तिवारी भारतीय राजनीति के फलक पर नीतीश कुमार एक ऐसी पहेली हैं, जिसे सुलझाने का दावा हर कोई करता है, लेकिन पूरी तरह कोई समझ नहीं पाता। एक ऐसा नेता, जिसके पास लालू प्रसाद यादव जैसा...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

पकिस्तान में सेना पर अंकुश लगाने की कोशिश

महेन्द्र तिवारी    पाकिस्तान की सियासत के सात दशकों का इतिहास यदि एक वाक्य में पिरोना हो, तो वह 'लोकतंत्र और वर्दी के बीच का कभी न खत्म होने वाला द्वंद्व' है। 14 अगस्त 1947 को वजूद में...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

प्रगतिशील ज्ञान और शिक्षा राष्ट्र के उत्थान की बुनियाद

यह सर्वविदित है कि इतिहास का पन्ना पलटें तो हर सभ्यता ने अपने कई कई रूप बदले हैंl संस्कृति ने नए नए नए आयाम का सृजन किया हैl वैसे भी जीवन परिवर्तन का पर्याय है एवं विकास का स्वरूप हैl...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

मैक्रों की पुकार, मोदी का संकेत: क्या बदलेगा डिजिटल भविष्य?

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” दिल्ली के  भारत मंडपम  में एआई इंपैक्ट समिट का वह क्षण ऐतिहासिक बन गया।  इमैनुएल मैक्रों  मंच पर खड़े थे; आँखों में गहरी चिंता और स्वर में पिता-सी व्याकुलता। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर देख कहा—...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

संवेदनशील प्रशासन और संयमित छात्र: संतुलन ही समाधान

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” कभी-कभी बस एक छोटा-सा क्षण पूरी व्यवस्था की आत्मा को बेनकाब कर देता है। घड़ी ने दस मिनट का फासला तय किया—और एक बच्ची परीक्षा कक्ष के बाहर रह गई। वही दस मिनट उसके जीवन और...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

राष्ट्र का सुनहरा भविष्य  युवाशक्ति ,नवयुवकों का जागरण और कर्तव्यबोध

भारत सदियों से संयम, त्याग और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रहा है। यहाँ आत्मसंयम को ही वास्तविक शक्ति माना गया है और चरित्र को ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति समझा गया है। यही कारण है कि इस देश ने...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

पाखंड की ओट में छुपा दान: क्या यह सच में पुण्य है?

प्रो. आरके जैन “अरिजीत”   मनुष्य की आत्मा जब अपने कर्मों का निष्पक्ष लेखा-जोखा करती है, तब सबसे पहले यह प्रश्न उसके अंतर्मन में गूँजता है—क्या धन की पवित्रता से बड़ा कोई नैतिक मूल्य हो सकता है? आज के...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

सदन की मर्यादा पर सवाल लोकतंत्र का मंदिर या सियासत का अखाड़ा?

बिहार विधान परिषद में हालिया हंगामे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे जनप्रतिनिधि लोकतंत्र की गरिमा को समझ रहे हैं या नहीं। मंत्री अशोक चौधरी और राजद के सुनील कुमार सिंह के...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा और दिल्ली पुलिस की जांच

महेन्द्र तिवारी    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी की पीडीएफ कॉपी के सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रसार को लेकर औपचारिक जांच शुरू कर दी...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

मोबाइल, नेटवर्क और सपने: लेकिन महिलाएं अब भी बाहर क्यों?

कृति आरके जैन हर सुबह घर में रोशनी से पहले जिम्मेदारियां जाग जाती हैं, और उसी के साथ एक महिला भी। मोबाइल की चमक दीवारों तक पहुंचती है, लेकिन उसकी हथेली तक नहीं। वह चूल्हे की आग में...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

क्या था एपस्टीन का बेबी रैंच प्लान?

- महेन्द्र तिवारी जेफ्री एपस्टीन का तथाकथित बेबी रैंच विचार आधुनिक समय के सबसे डरावने और विचलित करने वाले प्रसंगों में से एक माना जाता है। यह कोई औपचारिक योजना या लिखित परियोजना नहीं थी, बल्कि उसकी निजी बातचीतों...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

ए आई के दुरुपयोग का शिकार होते दुनियाभर के मासूम बच्चे

मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए विकसित की गई वैज्ञानिक तकनीक जहाँ एक ओर वरदान सिद्ध हुई है, वहीं इसके दुरुपयोग ने अनेक नई चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। संचार क्षेत्र में आई मोबाइल क्रांति...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार