एनडीटीवी केस: हाईकोर्ट ने प्रणय और राधिका रॉय को भेजे आयकर नोटिस रद्द किए, विभाग पर जुर्माना।
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने माना कि आयकर विभाग द्वारा आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लेन-देन को दोबारा खंगालने की कोशिश
स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एनडीटीवी के संस्थापकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय को मार्च 2016 में जारी किए गए इनकम टैक्स री-असेसमेंट नोटिस रद्द कर दिए हैं. इसके अलावा अदालत ने आयकर विभाग पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए निर्देश दिया है कि प्रत्येक याचिकाकर्ता को 1–1 लाख रुपये दिए जाएं.
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने माना कि आयकर विभाग द्वारा आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लेन-देन को दोबारा खंगालने की कोशिश गलत थी, क्योंकि इनकी पहले ही जांच हो चुकी थी.
अदालत ने रॉय दंपति की इस दलील से सहमति जताई कि एक ही मामले का दोबारा आकलन करना आयकर अधिनियम के तहत ‘राय में बदलाव’ (चेंज ऑफ ओपिनियन) के बराबर है, जो स्वीकार्य नहीं है.
बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग ने आरोप लगाया था कि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड से आरआरपीआर को दिया गया 403.85 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण, साथ ही आरआरपीआर और रॉय दंपति के बीच हुए शेयर ट्रांसफर की एक श्रृंखला, कर से बचने के उद्देश्य से की गई ‘दिखावटी लेन-देन’ (कलरेबल ट्रांजैक्शन) थे.
रॉय दंपति ने नवंबर 2017 में इस री-असेसमेंट के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने बताया कि आयकर विभाग जुलाई 2011 में पहले ही आकलन दोबारा खोल चुका था और उस दौरान इन्हीं मुद्दों की जांच की गई थी, जिसका निपटारा मार्च 2013 में पारित री-असेसमेंट आदेश के साथ हो गया था.
रॉय दंपति ने नवंबर 2017 में हाईकोर्ट का रुख किया था. उनका कहना था कि यह री-असेसमेंट की कार्यवाही उसी आकलन वर्ष (असेसमेंट ईयर) के लिए दूसरी बार आकलन दोबारा खोलने के बराबर है.
उन्होंने दलील दी थी कि विभाग पहले ही जुलाई 2011 में आकलन दोबारा खोल चुका था, जिसका निपटारा मार्च 2013 में पुनर्मूल्यांकन आदेश के साथ हो गया था. पीठ ने माना कि आयकर विभाग पहले की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में जांचे जा चुके मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकता.
अदालत ने आयकर विभाग के अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया और कहा कि ऐसे मामलों में कोई भी राशि पर्याप्त नहीं हो सकती, लेकिन एक प्रतीकात्मक जुर्माना लगाना ज़रूरी है.
रिपोर्ट में बताया गया कि री-असेसमेंट नोटिस से जुड़ी सभी आगे की कार्यवाहियों को भी रद्द कर दिया गया है. अदालत ने आदेश दिया, ‘दोनों रिट याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं. याचिकाकर्ताओं को 31 मार्च 2026 को जारी नोटिस तथा उनके आधार पर पारित कोई भी आदेश या शुरू की गई कोई भी कार्यवाही रद्द की जाती है.

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