गंगा पर पक्का पुल: 300 गांवों के इंतज़ार का अंत, शासन की मंजूरी से खुले विकास के द्वार

पीपापुल की मजबूरी खत्म, मांडा रोड से जंगीगंज तक 1340 मीटर लंबा टू लेन पुल बनेगा

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो 
प्रयागराज। 
 
मांडा रोड स्थित गंगा नदी पर वर्षों से प्रतीक्षित पक्के पुल को आखिरकार शासन की मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी कोरांव, करछना, मेजा, मांडा और जंगीगंज क्षेत्र के करीब 300 गांवों के लिए राहत और विकास की बड़ी सौगात लेकर आई है। इस टू लेन पुल के निर्माण से लगभग तीन लाख से अधिक की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और गंगा के दोनों किनारों पर बसे लोगों का आवागमन सुगम होगा।
 
अब बनारस और मिर्जापुर की दूरी कम होगी, समय बचेगा और जोखिम भरा सफर इतिहास बन जाएगा। अब तक मांडा रोड के डेंगुर घाट पर बने पीपापुल के सहारे ही लोगों को गंगा पार करनी पड़ती थी। बरसात में पुल हटते ही गांवों का संपर्क टूट जाता था, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत होती थी, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी।
 
इसी पीड़ा और मजबूरी ने पक्के पुल की मांग को जनआंदोलन का रूप दिया।शासन की स्वीकृति के बाद अब यह सपना हकीकत बनने जा रहा है। सेतु निगम की ओर से अगले वित्तीय वर्ष से पुल निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा। इस टू लेन पुल की कुल लंबाई 1340 मीटर होगी और इसके निर्माण पर लगभग 325 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। मई 2025 में मांडा रोड से जंगीगंज को जोड़ने वाले इस पुल का प्रस्ताव सेतु निगम द्वारा शासन को भेजा गया था, जिस पर अब अंतिम मुहर लग चुकी है।
 
पुल का निर्माण कार्य तीन वर्ष में पूरा किया जाएगा। यह पुल केवल एक संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की मजबूत कड़ी बनेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में यह पुल अहम भूमिका निभाएगा और वर्षों से चले आ रहे गंगा पार के संघर्ष का स्थायी समाधान साबित होगा। 
 
 

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