Lucknow मलिहाबाद के बागों में गोवंश कटान का गोरखधंधा, एक सांड की निर्मम हत्या, दूसरा कटने से बचा

युवकों की सूझबूझ से बची जान, पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल

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मलिहाबाद (लखनऊ)।

थाना मलिहाबाद क्षेत्र के ग्राम बिराहिमपुर में गोवंश कटान का संगठित और सुनियोजित गोरखधंधा सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। आम और लीची के घने बागों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर गोवंश की अवैध हत्या की जा रही है, जबकि पुलिस और प्रशासन की भूमिका लगातार सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार गांव निवासी सचिन और राजवीर खेतों की देखरेख के लिए बागों की ओर गए थे। इसी दौरान उन्होंने बाग के अंदर एक सांड का कटा हुआ शव देखा। कुछ ही दूरी पर दूसरा सांड रस्सी से बंधा हुआ मिला, जिसे काटने की पूरी तैयारी की जा चुकी थी। यह दृश्य देखकर दोनों युवक सन्न रह गए।

मलिहाबाद के बागों में गोवंश कटान का गोरखधंधा, एक सांड की निर्मम हत्या, दूसरा कटने से बचा

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए दोनों युवक तुरंत पास की दुकान से नया ब्लेड लेकर आए और रस्सी काटकर बंधे सांड को आज़ाद कराया। इसके बाद उन्होंने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन गोवंश कटान में शामिल लोग मौके से फरार हो चुके थे। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध का हिस्सा है।

बाग बने अपराधियों के सुरक्षित अड्डे

ग्रामीणों का आरोप है कि बिराहिमपुर और आसपास के गांवों में फैले घने बाग अवैध गतिविधियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुके हैं। रात के अंधेरे में बाहरी और संदिग्ध लोगों की आवाजाही आम बात हो गई है, लेकिन न तो पुलिस की नियमित गश्त होती है और न ही चौकी स्तर पर कोई निगरानी व्यवस्था है। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर गोवंश कटान जैसे संगीन अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।

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सूचना के बाद भी पुलिस की सुस्ती

स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना की सूचना थाना मलिहाबाद पुलिस को दिए जाने के बावजूद पुलिस मौके पर काफी देर से पहुंची। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और क्षेत्र को सुरक्षित करने में भी लापरवाही बरती गई। ग्रामीणों के अनुसार, कटे हुए सांड के अवशेष काफी समय तक बाग में पड़े रहे, जिससे इलाके में दुर्गंध फैल गई और आवारा जानवरों का जमावड़ा लग गया।

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पहले भी मिल चुके हैं अवशेष

ग्रामीणों का दावा है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी क्षेत्र में गोवंश के अवशेष मिलने की सूचनाएं मिलती रही हैं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। न तो आरोपियों की पहचान हो सकी और न ही किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा किया गया।

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ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि

बागों और सुनसान इलाकों में रात्रि गश्त बढ़ाई जाए,

संदिग्ध लोगों की पहचान व सत्यापन कराया जाए,

गोवंश संरक्षण कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाए,

तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

पुलिस का पक्ष

इस मामले में थाना मलिहाबाद पुलिस से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और अज्ञात आरोपियों की तलाश जारी है।

युवकों की सूझबूझ से बची जान, पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल

फिलहाल, यह घटना न केवल क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि गोवंश सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे अपराधों के बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों का कहना है कि बिराहिमपुर और आसपास के गांवों में फैले आम और लीची के घने बाग अवैध गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनते जा रहे हैं। रात के समय इन बागों में बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है, लेकिन न तो पुलिस गश्त होती है और न ही चौकी स्तर पर कोई निगरानी दिखाई देती है। इसी का फायदा उठाकर गोवंश कटान जैसे संगीन अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जब इस घटना की सूचना थाना मलिहाबाद पुलिस को दी गई, तो मौके पर पहुंचने में देरी हुई और आवश्यक साक्ष्य जुटाने में भी लापरवाही बरती गई। ग्रामीणों के अनुसार, कटे हुए सांड के अवशेष काफी समय तक बाग में पड़े रहे, जिससे आवारा जानवरों और दुर्गंध की समस्या भी उत्पन्न हो गई।

इस संबंध में जब थाना मलिहाबाद पुलिस से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो समाचार लिखे जाने तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आ सका। हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों की तलाश जारी है।

फिलहाल, इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि गोवंश सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की भी पोल खोल दी है। ग्रामीणों में डर और नाराजगी दोनों का माहौल है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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