हवन यज्ञ और भंडारे के साथ हुआ श्रीमद् भागवत कथा का समापन

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महराजगंज/रायबरेली। शिवगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत भवानीगढ़, देहली में सप्तवेदी, गणेश आंबिका, रूद्र हनुमत देव, सहित मोक्षदायिनी श्रीमद् भागवत कथा यजमान कालिका प्रसाद मिश्रा, सपत्नीक राजेश्वरी मिश्रा, के यहां आनंद मिश्रा के द्वारा संकल्पित चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का विश्व शांति एवं सर्व कल्याण की कामना के साथ बड़े ही धूमधाम के साथ समापन हुआ। भागवत कथा के समापन पर हवन यज्ञ और विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया।
 
भंडारे में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं ने जयकारे भी लगाए श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा पांडाल गुंजायमान हो गया।आपको बता दें कि, यजमान कालिका प्रसाद मिश्रा, सपत्नीक राजेश्वरी मिश्रा समेत गांव के लोगो ने हवन किया। हवन के दौरान कथा व्यास पंडित वागीश रामचंद्र दास ने कहा कि, आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा।
 
हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं।
 
विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक पंडित वागीश रामचंद्र दास ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि, प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य का शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है।
 
जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा का समापन सोमवार को विधिविधान से  पूजा आरती पाठ कर यज्ञशाला में दोपहर तक  हवन किया गया। तत्पश्चात भंडारे का प्रसाद वितरित हुआ जो प्रभु की इच्छा तक चलता रहा।
 
महराजगंज क्षेत्र के ग्राम सभा जिहवा के रहने वाले आनंद मिश्रा ने बताया कि, हर दूसरे महीने अलग-अलग स्थानों पर उनके द्वारा संकल्पित श्रीमद् भागवत कथाओं का आयोजन किया किया जा रहा है, यह उनके द्वारा आयोजित पांचवी श्रीमद् भागवत कथा है, जिसका समापन बड़े ही विधिविधान से हवन पूजन एवं भंडारे के साथ संपन्न हुआ। 
इस मौके पर यज्ञशाला प्रमुख आचार्य पंडित योगेंद्र त्रिपाठी, परिचायक अमरेश शुक्ला, आकाश मिश्रा, 
 
मुख्य यजमान कालिका प्रसाद मिश्रा, सपत्नीक राजेश्वरी मिश्रा सहित, सुमित मिश्रा,रुद्रेश मिश्रा, पंकज मिश्रा, रामानुज मिश्रा, कनिक मिश्रा, अमित मिश्रा, आकाश मिश्रा, विकाश मिश्रा, कृष्ण मिश्रा, हर्षित मिश्रा, अरुण तिवारी, अनूप अवस्थी, सुभाष मिश्रा, अरविंद सिंह, विवेक मिश्रा, जितेंद्र सिंह, रागेन्द्र सिंह, रामू त्यागी सहित बड़ी तादात में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

 

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