शबे बरात इबादत की रात है, सड़को पर बाइको से तमाशा करने की नहीः नूर अहमद अजहरी

हाफ़िज़ नूर अहमद अजहरी बोले, किसी तरह की ज़्यादती हुड़दंगी का नाम इस्लाम नहीं शबे बरात दुआ और अस्तगफ़ार की रात है मोटर साइकिलों पर कर्तव्व दिखाने की नहीं

Swatantra Prabhat Desk Picture
Published On

पूरनपुर, पीलीभीत। शबे ए बारात 13 फरवरी को मनाई जाएगी जिसकी तैयारियां जोर-जोर से चल रही हैं। मुस्लिम समाज के लोग घरों में हलवा कतली आदि पर फातिहा कराते है। रात भर जाग कर मस्जिदों में इबादत व अल्लाह का जिक्र करते हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ़ इण्डिया के प्रदेश अध्यक्ष हाफ़िज़ नूर अहमद अज़हरी ने बृहस्पतिवार को होने वाली शबे बरात के मौके पर गुफ्तगू की गई।
 
मुस्लिम धर्म के पवित्र त्योहार पर हाफ़िज़ नूर अहमद अज़हरी ने जवानों बुजुर्गों और ज़िम्मेदारों से खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम हुड़दंग खेलकूद की इजाज़त नहीं देता शबे बरात के मौके पर जो लोग इस पवित्र रात को मोटर साइकिलों से कर्तव्य दिखाते फिरते हैं वह सारे लोग धोके में हैं वह रात इबादत की रात है अल्लाह से मदद मांगने की रात है।
 
बर्चस्व दिखाने या भागने दौड़ने उधम मचाने की रात नहीं उन्होंने कहा कि बच्चो के अभिभावकों को भी अपने बच्चो के भविष्य का ख्याल रखना चाहिए जिस तरह से दो दो चार लोग मोटर साइकिलों पर बैठ कर सड़कों पर तमाशा करते हैं यह गुनाह है अल्लाह से तौबा करें और इस रात की इबादत को बेकार ना होने दें किसी तरह की आतिशबाज़ी ना करें इस्लाम आतिशबाज़ी की इजाज़त नहीं देता कब्रिस्तान जाएं अपने पुरखों की बख्शिश की दुआ मांगें साथ ही याद रखें कि यह दौर नाजुक दौर है हालांकि मुसलमानों के लिए हर दौर नाजुक रहा है मगर इस दौर में इस्लाम दुश्मन ताकतें आप की गलतियों की ताक में हैं इस लिए अपने पैगम्बर की सीरत को अखलाक अच्छे करें।
 
उन्होंने प्रशासनिक में से कहा कि अमन के लिए आपसी के लिए सर्व समाज के मिल्ली समाजी सियासी मज़हबी लोगो से राब्ता करें उन्होंने कहा कि जहां जहां इस रात को महफिलें सजती हैं जलसे होते हैं वह सब अपने मज़हब के दायरे में रहकर और अमन के साथ ही होते हैं उन के साथ किसी भी किस्म की ज्यादती ना होने दें जहां जहां पुलिस फोर्स की ज़रूरत है वहां पुलिस फोर्स मुहैया कराई जाए उलमा और इमाम हजरात का ख्याल रखा जाए कब्रिस्तान जाने वाले लोगो को परेशान ना किया जाए मस्जिदों के बाहर खड़े लोगो के साथ बेहतर बरताव करें। मस्जिदों के इमाम मस्जिदों में कस कर अवाम को यह मैसेज दे दें कि सभी लोग चलते फिरते रहें रास्ते में भीड़ जमा ना होने दें मोटर साइकिल सवारों के जो माता पिता हैं वह अपने बच्चो पर सख्त निगाह रखें ताकि उन्हें किसी तरह की तकलीफ ना पहुंचे किसी भी हाल में कानून हाथ में लेने से बाज़ आएं।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें

नवीनतम समाचार