दीवानी न्यायालय के स्थापना में हो रहें विलम्ब को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश ।

 मुख्यमंत्री  से दीवानी न्यायालय के स्थापना कराएं जानें की मांग ।

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कोरांव/प्रयागराज। तहसील कोरांव जनपद प्रयागराज से 80 किमी की दूरी पर स्थित है, जहां से मध्यप्रदेश की सीमा संलग्न है। तहसील कोरांव का आखिरी गांव हंडिया मानपुर है, जहां से मध्यप्रदेश की सीमा प्रारम्भ होती है। वहीं दूसरी ओर राजपूर जो मिर्जापुर से सटा हुआ है। 
 
इस प्रकार देखा जाय तो प्रयागराज में मुकदमा देखने के लिए 120 से 140 किलोमीटर का सफर वाद कारियों को पूरा करना पड़ता है।जिसको देखते हुए  हाईकोर्ट ने वादकारियों को सुगम व सरल न्याय प्रदान करने के लिए जनपद प्रयागराज में हंडिया व कोरांव में दिवानी न्यायालय स्थापित करने का निर्णय लिया,जिसका परिणाम रहा कि हंडिया में न्यायालय सुचारु रूप से न्यायिक कार्य प्रारम्भ हो गया।वहीं पांच वर्ष बीत जाने के वावजूद भी कोरांव में दिवानी न्यायालय की स्थापना नहीं हो सकीं जबकि कोरांव में दिवानी न्यायालय हेतु जमीन भी अधिग्रहण किया जा चुका है, फिर भी निर्माण कार्य अधर में ही लटक कर दम तोड़ रहा है।
 
जिसका खामियाजा वादकारियों को भुगतना पड़ रहा है आएं दिन न्याय की आश लेकर जाते जरूर है। पर उन्हें तारिख से ही सन्तोष का सामना करना पड़ रहा है।जिसको लेकर वादकारियों ने और वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामा कांत तिवारी उर्फ बागी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तहसील कोरांव में दिवानी न्यायालय की स्थापना कराएं जानें की मांग की है।
 
 
 इस सम्बन्ध में वरिष्ठ अधिवक्ता बाल गोविन्द पाण्डेय पूर्व आय ब्ययनिरीक्षक श्यामा कान्त त्रिपाठी वरिष्ठ अधिवक्ता इन्देश पाण्डेय अधिवक्ता यादवेंद्र अहीर का कहना है कि जनपद न्यायालय की दूरी ज्यादा होने के कारण  वादकारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

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