मानवता

वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना

भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. इस की मिसाल है पहल 'दाना-पानी'।

स्वतंत्र प्रभात।      ब्यूरो प्रयागराज।    गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता...
आपका शहर  पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश 

ओबरा में दयालु ने बचाई एक बच्ची की जिंदगी ,भीख मांगने को मजबूर शिवानी को नई जिंदगी की आश

भीख देने से पहले जरूर पूछ ताछ करें ताकि उनकी सही समय पर मदद हो सके - आनंद पटेल दयालु
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