कोरोना महामारी में नर्सों ने स्वास्थ्य सेवाओं को दिया अतुलनीय योगदान ​​​​​​​

Swatantra Prabhat Picture
Published On

आज नर्स दिवस देश भर में कार्यरत समस्त नर्सों को नमन


स्वतंत्र प्रभात-

बलिया में मां को बचाने उतरे बीटेक छात्र की मौत  Read More बलिया में मां को बचाने उतरे बीटेक छात्र की मौत

नवाबगंज/उन्नाव।

दुनिया पिछले दो साल से भी अधिक समय से कोरोना संक्रमण से जूझ रही है. महामारी से करोड़ों लोगों की जान बचाने में सबसे बड़ा योगदान रहा है नर्सों का, जो खुद संक्रमित होने के खतरे के बावजूद लोगों की जान बचाने में जुटी हैं. अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (12 मई) पर नर्सों के इस योगदान को नमन करना जरूरी है।

रामनवमी पर रिहंदेश्वर धाम में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़ Read More रामनवमी पर रिहंदेश्वर धाम में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़

कोरोना काल में दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत हुई लेकिन करोड़ों लोगों के प्राण बचाने में भी सफलता मिली। इसका श्रेय जाता है नर्सिंग कर्मियों को, जो स्वयं के संक्रमित होने के खतरे के बावजूद अपनी जान की परवाह किए बिना ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने में जुटे रहे। यह दिवस दया और सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल की स्मृति में मनाया जाता है,

पडरौना: “गैस उपभोक्ताओं को न हो परेशानी, ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई हो” — राजन जायसवाल  Read More पडरौना: “गैस उपभोक्ताओं को न हो परेशानी, ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई हो” — राजन जायसवाल

जिन्हें ‘आधुनिक नर्सिंग की जन्मदाता’ माना जाता है।सदा बचाती हैं रोगी को दुख, दर्दों बीमारी से, भेदभाव को नहीं करें वह नर रोगी और नारी से। देख बुलंदी को नर्सों की बीमारी डर जाती है फ्लोरेंस की वह पावन बेटी नर्स कहलाती है। नर्स और उनके सम्मानजनक पेशे के लिए किसी कवि की ये पंक्तियां सटीक हैं। कोरोना महामारी जब काल का रूप लेकर लोगों पर कहर बरपा रही थी,उस दौर में ये नर्स खुद अपनी और अपने परिवार की चिंता छोड़कर मरीजों की जान बचाने में जुटी थी।

डॉक्टर के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ की भी अहम भूमिका है। नर्स अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रही थीं। इन्होंने खुद को तो कोरोना योद्धा के तौर पर झोंक रखा था लेकिन परिवार वालों से दूरी बना ली थीं। नर्सों का कहना था कि इस समय में तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई थी। कइयों को ड्यूटी करने के बाद क्वारंटीन रहना पड़ रहा थी, ऐसे में कोई बच्चे को सास के पास छोड़ आया था तो कोई रिश्तेदार के पास।

किसी ने घर पर ही कमरा अलग कर लिया था तो कोई बीमार बच्चे तक की देखभाल नहीं कर पा रहा था।अनामिका पाण्डेय जनपद अयोध्या निवासिनी ने बताया कि कोरोना काल मे घर परिवार से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर रहकर क्षेत्र के एक  मेडिकल कॉलेज में कोरोना काल मे सेवाएं दी।घर पर माता पिता भाई बहन से चार माह तक नही मिलने जा पाई तो फोन द्वारा वीडियो कॉल के माध्यम से बात होती थी।

घर मे परिजन भी परेशान रहते थे,लेकिन उनको हमेशा समझाया करती थी।घर की याद हमे भी बहुत आती थी।लेकिन इस भयावह महामारी में लोगो की मद्दत करने का जज्बा था।इसलिए यही रहकर मरीजों की देखभाल की।स्थिति सामान्य होने पर परिजनों के पास मिलने गयी थी।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें