विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: बाराबंकी के इचौलिया गाँव में ‘जल जीवन मिशन’ बना जन-आंदोलन, बदल गई 2100 से अधिक ग्रामीणों की तकदीर

2172 लोगों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

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विशेष संवाददाता, बाराबंकी

बाराबंकी।

ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने और बुनियादी सुविधाओं को अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ 'जल जीवन मिशन' अब उत्तर प्रदेश के गाँवों में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इसका सबसे जीवंत और प्रेरणादायी उदाहरण जनपद बाराबंकी के विकास खंड मसौली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत इचौलिया में देखने को मिल रहा है। कभी दूरस्थ और पिछड़ेपन की मार झेलने वाले इस क्षेत्र में आज पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक शुद्ध पेयजल पहुँच रहा है, जिसने यहाँ के सामाजिक और स्वास्थ्य परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।

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लंबी कतारों और दूषित पानी से मिली मुक्ति

कुछ समय पहले तक इचौलिया और उसके आस-पास के गाँवों में सुबह और शाम का वक्त सिर्फ पानी के इंतजाम में बीत जाता था। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को पीने के पानी के लिए हैंडपंपों पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। गर्मियों के दिनों में जब पारंपरिक जल स्रोत और तालाब सूख जाते थे, तो यह समस्या और भी विकराल हो जाती थी। इसके अलावा, जमीन से निकलने वाले आर्सेनिक और बालू युक्त पानी के कारण ग्रामीणों को पेट और त्वचा से जुड़ी तमाम तरह की बीमारियाँ झेलनी पड़ती थीं।

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जल जीवन मिशन (हर घर जल योजना) के लागू होने के बाद से यह पूरी जद्दोजहद अब इतिहास बन चुकी है। अब गाँव की महिलाओं को पानी के लिए घर से बाहर कदम नहीं रखना पड़ता।

इचौलिया की आधुनिक जल संरचना: विकास का नया मॉडल

विकास खंड मसौली की ग्राम पंचायत इचौलिया में इस योजना को सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर बेहद आधुनिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ तरीके से उतारा गया है। यहाँ स्थापित किया गया नया वाटर सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर किसी शहरी टाउनशिप से कम नहीं है। इस परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित अत्याधुनिक प्रणालियाँ तैयार की गई हैं:

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  • उच्च क्षमता वाला ओवरहेड टैंक (शिरोपरि जलाशय): पूरे गाँव में समान दबाव (Water Pressure) के साथ पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशाल और ऊँचे शिरोपरि जलाशय का निर्माण किया गया है।

  • गहरे बोर का नलकूप (ट्यूबवेल): भूजल के शुद्ध और सुरक्षित स्तर तक पहुँचने के लिए गहराई पर बोरिंग की गई है, जिससे स्वच्छ और बिना बालू वाला पानी मिलता है।

  • स्वचालित पंप हाउस प्रणाली: पानी की री-फिलिंग और सप्लाई की पूरी प्रक्रिया को ऑटोमैटिक (स्वचालित) बनाया गया है, जिससे मानवीय गलतियों की गुंजाइश खत्म हो गई है।

  • सोलर ऊर्जा आधारित संचालन प्रणाली: इस प्लांट की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल होना है। बिजली संकट से बेअसर, यह पूरी प्रणाली सौर ऊर्जा से संचालित होती है, जिससे बिजली बिल की बचत होती है और जलापूर्ति कभी बाधित नहीं होती।

  • मजबूत बाउंड्रीवॉल और सुरक्षा प्रबंध: पूरे परिसर को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रहे।

  • व्यापक पाइपलाइन वितरण नेटवर्क: गाँव की हर गली और हर घर को कवर करते हुए एक मजबूत और टिकाऊ पाइपलाइन का जाल बिछाया गया है, जिससे अंतिम छोर पर बसे परिवार को भी पूरा पानी मिल सके।

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2172 लोगों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

इस आधुनिक और सौर-ऊर्जा संचालित व्यवस्था के माध्यम से वर्तमान में इचौलिया गाँव के लगभग 2172 नागरिकों को रोजाना नियमित अंतराल पर स्वच्छ, सुरक्षित और क्लोरीनीकृत पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्वास्थ्य और समृद्धि का नया सवेरा:

शुद्ध पानी मिलने से गाँव में जल जनित बीमारियों (Water-borne diseases) में भारी कमी दर्ज की गई है। स्थानीय पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) के आंकड़ों के मुताबिक, दूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ अब न के बराबर रह गई हैं। साथ ही, पानी भरने में जो समय बर्बाद होता था, उसका उपयोग अब महिलाएँ स्वरोजगार और बच्चे पढ़ाई में कर रहे हैं।

इचौलिया की यह सफलता कहानी अब मसौली ब्लॉक के अन्य पिछड़े गाँवों के लिए एक 'रोल मॉडल' बन गई है। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं को सही तकनीक और स्थानीय जनभागीदारी के साथ लागू किया जाए, तो ग्रामीण भारत का कायाकल्प दूर की कौड़ी नहीं है।

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