लाइफ लाइन हास्पिटल बस्ती की लापरवाही से एक नवजात ने तोड़ा दम

मृतका के परिवारजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए गम्भीर आरोप, अस्पताल प्रशासन ने मृतका व परिजनों को जबरदस्ती रोके रखा अस्पताल में

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बस्ती। बस्ती जिलेमें निजी अस्पतालों के गोरखधंधे का शिकार फिर एक नवजात हुई और लाइफ लाइन हास्पिटल के कर्मचारियों  की जालसाजी से उसकी जान चली गयी और अस्पताल प्रशासन द्वारा मृतका के तीमारदारों से फोन कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु पीड़ित पक्ष बिना कार्यवाही किसी भी शर्त को मानने को तैयार नहीं है ।
 
मिली जानकारी के अनुसार माधुरी पत्नी दिलीप निवासी परसामाफी , विकास खण्ड सांथा जनपद - संतकबीर नगर ने 12 मार्च 2026 को दिन में 4 बजे प्रतापपुर के एक सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र में नवजात को जन्म दिया। स्वास्थ्य केन्द्र पर बताया गया कि बच्चा जन्म के बाद रोया नही , कोई समस्या न हो इसलिए बच्चे को कहीं स्पेस्लिस्ट डाक्टर को दिखाया जाए। इसके बाद नवजात के परिजन उसे लेकर नंदौर आए और वहाँ पर एक पैथालोजी में सीबीसी व अन्य जाँच करवाया।
 
रिपोर्ट में इंफेक्शन की पुष्टि हुई और तुरन्त ही परिजन वहाँ से चलकर लाइफ लाइन अस्पताल बस्ती पहुँचे व रात कबीर 10.30 बजे भर्ती करा दिया , यहीं से फिर अस्पताल वालों के लूटपाट का खेला शुरु हो जाता है। एक सप्ताह भर्ती रहने के बाद प्रतिदिन अस्पताल प्रशासन द्वारा हजारो से ऊपर की दवाएं क्रय करायी गयी परन्तु मरीज के स्थिति में कोई अच्छा सुधार नहीं आया।
 
दिनाँक 21 मार्च को नवजात के तीमारदारों द्वारा अस्पताल प्रशासन से मरीर को रिफर करने की बात की गयी परन्तु अस्पताल के जिम्मेदारों द्वारा तीमारदारों को समझाया गया कि आज तक का जो हिसाब रुपया 36000 हजार बन रहा है उसे जमा करा दो बच्चा ठीक है दो चार दिन और रहो उसका कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा इसके बाद बच्चा पूर्णतः स्वस्थ्य हो जायेगा और हम उसे डिस्चार्ज कर देंगें।
 
धीरे धीरे बच्चे की हालत  बिगड़ती गयी और दिनांक 28 मार्च दिन शनिवार को अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीज के तीमारदारों के पास फोन करके बताया गया कि आपका बच्चा स्वस्थ्य हो गया है आकर डिस्चार्ज करा लीजिए और तीमारदारों के आते ही पैसे की माँग करते हुए रुपये 7000 का और भुगतान कराया गया और आनन - फानन में मरीज को यह कहते हुए डिस्चार्ज कर दिया गया कि बच्चा स्वस्थ्य हो गया है इसे ले जाइए । घर पहुंचते ही बच्चा सीरियस होता गया और अगले दिन अर्थात् 29 मार्च को दम तोड़ दिया।
 
बच्चे की मौत की खबर जब लाइफ लाइन हॉस्पिटल  को लगी तभी से अस्पताल प्रशासन व गोल्डी नामक कर्मचारी मामले को दबाने में लगे हैं । यद्यपि परिजन कार्यवाही के सिवाय किसी शर्त पर मानने को तैयार नहीं हैं और परिजन यहाँ तक कह रहे  हैं कि हमने खेत गिरवी रखकर  बच्चे की दवा कराया और अस्पताल वाले हमसे हमारा बच्चा भी छीन लिए और ऊपर से कर्ज का बोझ और लद गया।
 
लाइफ लाइन हॉस्पिटल के लिए यह कोई नयी बात नहीं है बिना जाँच ही तीमारदारों से जांच के पैसे जबरदस्ती जमा कराएं जाते हैं । पीड़ित दिलीप व माधुरी तथा अन्य तीमारदारों ने लाइफ लाइन हॉस्पिटल पर कठोर कार्यवाही करते हुए दवा के नाम पर गलत तरीके से वसूले गए पैसे को वापस कराने की मांग जिला प्रशासन से किया है ।

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