लालगंज में सरकारी गड़ही पर अवैध कब्जा, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल; केंद्र के सख्त कानून के बीच बढ़ा विवाद

जनपद के सभी तहसीलों पर के जिम्मेदार अधिकारियों पर जिला अधिकारी को शिकंजा कसना चाहिए सरकारी भूमि को तत्काल खाली कराया जाए यह मुख्यमंत्री का आदेश नहीं मान रहे जिले के जिम्मेदार

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बस्ती। बस्ती जिले के जिला अधिकारी को मुख्यमंत्री के आदेशों को ध्यान में रखते हुए सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के ऊपर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जनपद के सभी तहसीलों में सरकारी जमीनों पर दबंग भू माफिया का कब्जा बरकरार रहा और कर रहे जिम्मेदार अधिकारी को मामले को तुरंत संज्ञान में लेकर एफआईआर दर्ज करवाना चाहिए ताजा मामला बस्ती के लालगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सभा मेहनौना के कटाईजोत पुरवा में सरकारी जलमग्न भूमि (गड़ही) पर अवैध कब्जे का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है।
 
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।ग्रामीणों के अनुसार, अभिलेखों में दर्ज गड़ही संख्या 25 का क्षेत्रफल लगभग 81 एयर है, लेकिन वर्तमान में यह घटकर महज 15 से 20 एयर रह गया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने इस जमीन पर मिट्टी डालकर कब्जा कर लिया और स्थायी निर्माण भी कर लिया। विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकी और विवाद का सामना करना पड़ा, जिससे मामला और तनावपूर्ण हो गया है।
 
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह गड़ही पूरे कटाईजोत पुरवा के लिए प्राकृतिक जल निकासी का मुख्य स्रोत है। इसके बावजूद यहां बिना किसी वैध अनुमति के खड़ंजा निर्माण करा दिया गया, जो नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी सरकारी भूमि पर निर्माण के लिए उपजिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है, लेकिन यहां इस प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
 
सरकारी नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ग्राम समाज की भूमि — जैसे गड़ही, पोखरा, नाला और चारागाह — पर किसी भी प्रकार का निजी कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इस तरह के मामलों का सामने आना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
 
इसी बीच केंद्र सरकार द्वारा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त प्रावधान लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत अवैध कब्जाधारियों पर भारी जुर्माना और जेल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, कब्जा करने पर पहले महीने में 40 गुना तक जुर्माना और उसके बाद हर महीने 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ दंड तय किया जाएगा। साथ ही दोषियों को छह महीने तक की सजा या जमीन के मूल्य के अनुसार आर्थिक दंड भी दिया जा सकता है।
 
ऐसे सख्त कानूनों के बावजूद लालगंज का यह मामला प्रशासन की उदासीनता को उजागर करता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गड़ही को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उक्त समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा कई बार अवैध कब्जा हटाने के लिए प्रशासन से मांग किया गया लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई |

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