ओबरा-चोपन मार्ग पर विकास की धूल में दफन होती नागरिक संवेदनाएं

लोगों के लिए सड़क जानलेवा साबित , प्रशासन से रोक लगाने की मांग

अजित सिंह / राजेश तिवारी Picture
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ब्यूरो रिपोर्ट

ओबरा / सोनभद्र -

 उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद का औद्योगिक गौरव कहा जाने वाला ओबरा-चोपन मुख्य मार्ग आज प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत गलियारा बन चुका है। भारी वाहनों की गड़गड़ाहट और धूल के गुबार के बीच यह सड़क अब राहगीरों के लिए डेथ ट्रैप (मौत का जाल) साबित हो रही है। औद्योगिक और खनन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होने के कारण इस मार्ग पर दिन-रात भारी वाहनों का रेला लगा रहता है। ट्रकों से गिरने वाली बालू, मोरंग और गिट्टी ने सड़क के किनारों पर लगभग एक-एक मीटर मोटी परत बना ली है।

सड़क की वास्तविक चौड़ाई कम होने से दो बड़े वाहनों का एक साथ गुजरना जानलेवा हो गया है। गर्मियों में उड़ती धूल फेफड़ों की बीमारियां बांट रही है, तो बारिश के मौसम में यही मलबा फिसलन भरे कीचड़ में तब्दील होकर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहा है। स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या को लेकर चुप बैठना स्वीकार नहीं किया। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक लिखित शिकायतें और वीडियो साक्ष्य भेजे गए। प्रशासनिक फाइलों में इन शिकायतों का निस्तारण तो दिखा दिया गया, लेकिन धरातल पर एक इंच मिट्टी भी नहीं हटी। मंगलवार को एक अज्ञात वाहन द्वारा बाइक सवार को टक्कर मारना इसी आपराधिक अनदेखी का ताजा और दर्दनाक परिणाम है।

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भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन और स्वच्छ वातावरण का मौलिक अधिकार देता है। सुरक्षित सड़क और प्रदूषण मुक्त हवा कोई सरकारी सुविधा नहीं बल्कि जनता का हक है। जब जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद मौन साधे रहते हैं, तो यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनविश्वास पर प्रहार है। क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि या सामूहिक दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। औद्योगिक क्षेत्र से प्राप्त होने वाले भारी-भरकम राजस्व का एक हिस्सा इन सड़कों के रखरखाव पर क्यों खर्च नहीं होता।

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कागजी निस्तारण की झूठी रिपोर्ट पेश करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी। ओबरा-चोपन मार्ग की वैज्ञानिक तरीके से सफाई और नियमित रखरखाव अब कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य आवश्यकता है। यदि समय रहते जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने सुध नहीं ली, तो यह धूल और मलबा केवल सड़क को ही नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक संवेदनशीलता को भी दफन कर देगा।

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