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यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हिसार की यू-ट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा। पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद करीब 10 महीने बाद जेल से बाहर आने की उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।
पिछली सुनवाई के दौरान जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। ज्योति की ओर से दलील दी गई थी कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का कोई ठोस आधार नहीं है। साथ ही उन्होंने अदालत से उनकी व्हाट्सएप चैट का रिकॉर्ड तलब करने की मांग भी की थी। इस पर अदालत ने जांच अधिकारी को संबंधित रिकॉर्ड के साथ पेश होने का आदेश दिया था।
पाकिस्तान उच्चायोग में मुलाकात का आरोप
एफआईआर के अनुसार यह मामला इंटेलिजेंस ब्यूरो की इनपुट रिपोर्ट से जुड़ा है। आरोप है कि ज्योति वर्ष 2023 में नई दिल्ली स्थित Pakistan High Commission New Delhi में वीजा आवेदन के लिए गई थीं, जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी Ahsan-ur-Rahim उर्फ दानिश से हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मुलाकात के बाद भारत से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान का संदेह जताया गया है।
खुद को ट्रैवल ब्लॉगर बताया
ज्योति की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह एक पेशेवर ट्रैवल ब्लॉगर हैं और खुले तौर पर कैमरा लेकर वीडियो बनाती हैं और सोशल मीडिया पर अपलोड करती हैं। ऐसे में उन्हें जासूस बताना अविश्वसनीय और निराधार बताया गया। उनके वकील रवींद्र ढुल ने अदालत में दलील दी कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत जिन शर्तों की जरूरत होती है, जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश या किसी संवेदनशील स्थान का स्केच या मॉडल तैयार करना, वह इस मामले में लागू नहीं होतीं।
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याचिका में यह भी कहा गया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 को लागू करना उचित नहीं है, क्योंकि कथित मुलाकात वर्ष 2023 में हुई थी, जबकि नई दंड संहिता बाद में लागू हुई। साथ ही यह भी दलील दी गई कि पुराने कानून में राजद्रोह की धारा 124ए पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है।
पिता की बीमारी का भी दिया हवाला
गौरतलब है कि ज्योति मई 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। जमानत याचिका में यह भी कहा गया था कि वह अपने परिवार में बुजुर्ग पिता और बीमार ताऊ की एकमात्र देखभाल करने वाली सदस्य हैं। दोनों उम्र से जुड़ी कई बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि इन दलीलों के बावजूद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l

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