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झारखंड का अबुआ दिशोम बजट सिर्फ आंकड़ों की है बाजीगरी और जन-आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात : मनीष जायसवाल
हजारीबाग, झारखंड:- झारखंड की झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट विकास का रोडमैप नहीं, बल्कि राज्य के वित्तीय कुप्रबंधन की विफलता का एक निराशाजनक दस्तावेज़ है। रजत जयंती वर्ष के नाम पर परोसा गया यह बजट पूरी तरह से दिशाहीन और आधारहीन है, जिसमें विजन का नितांत अभाव झलकता है। सरकार न तो राजस्व सृजन की कोई स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत कर पाई है और न ही विकास की कोई ठोस और दीर्घकालिक दिशा दिखा सकी है।
यह बजट केवल आंकड़ों का एक ऐसा मायाजाल बनकर रह गया है, जिसका जमीनी हकीकत और झारखंड की आम जनता की जरूरतों से कोई सीधा सरोकार नजर नहीं आता। उक्त बातें झारखंड सरकार द्वारा मंगलवार को पेश किए गए अबुआ दिशोम बजट पर हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद ने मनीष जायसवाल ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य का युवा वर्ग आज खुद को सबसे अधिक ठगा हुआ महसूस कर रहा है, क्योंकि इस बजट में न तो रोजगार के लिए कोई ठोस पहल है और न ही छात्रवृत्ति या अवसरों के विस्तार की कोई स्पष्ट योजना।
10 लाख नौकरियों का वादा करने वाली सरकार ने अनुबंधकर्मियों के भविष्य और युवाओं के सशक्तिकरण पर पूर्ण चुप्पी साध रखी है। इसी तरह अन्नदाता किसानों के लिए कोई सार्थक राहत नहीं दी गई है और न ही महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन हेतु कोई मजबूत कदम उठाया गया है। वृद्ध और दिव्यांगजनों की पेंशन में भी कोई सम्मानजनक वृद्धि न करना सरकार के संवेदनहीन दृष्टिकोण को उजागर करता है ।
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिला अस्पतालों में मेमोग्राफी और पेट स्कैन जैसी आधुनिक सुविधाओं की घोषणा केवल "मुंगेरीलाल के हसीन सपने" दिखाने जैसा है, क्योंकि वर्तमान में संचालित बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चौपट हो चुकी हैं। झारखंड को आज खोखले दावों और कागजी घोषणाओं की नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है। यह बजट जन अपेक्षाओं की कसौटी पर पूरी तरह विफल साबित हुआ है और राज्य की जागरूक जनता इस भेदभावपूर्ण और निराशाजनक बजट को कभी स्वीकार नहीं करेगी। संवेदनहीनता और जुमलेबाजी का यह दौर अब झारखंड की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन चुका है ।

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