फर्जी वरासत मामले में आया नया मोड़ जांच में जुटी पुलिस
आखिर किसने बनाया फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, और किसने बनाया फर्जी परिवार रजिस्टर नकल पिंकी देवी पत्नी बिंदर पाल का मायका नौरंगाबाद में है इनके पिता का नाम झब्बू है तो फिर हरिराम धोबी पिता कैसे हो गये
लखीमपुर खीरी- तहसील गोला के अंतर्गत ग्राम हर दुआ में लगभग 35 वर्ष पूर्व रह रहे और वर्तमान में जिला बस्ती में रहने वाले वाले हरीराम पुत्र रजई की जमीन की फर्जी वरासत में नया मोड़ आ गया है बताते चलें कि हर दुआ निवासी पिंकी देवी पत्नी बिंदर पाल ने लेखपाल भूपेंद्र वर्मा और प्रधान रामकिशुन से मिली भगत करके फर्जी जाली बनाये गये मृत्यु प्रमाणपत्र में हरीराम को मृतका दिखा कर फर्जी बनाई गई परिवार रजिस्टर नकल में पिंकी देवी को फर्जी तरीके से हरीराम की पुत्री दिखा कर तहसील दार गोला को भारी नजराना देकर फर्जी वरासत आदेश करा लिए जाने का आरोप हरीराम ने लगाया है।
हरीराम का आरोप है कि लेखपाल भूपेंद्र वर्मा ने फर्जी रिपोर्ट लगाई है और इस फर्जीवाड़ा के मास्टरमाइंड लेखपाल भूपेंद्र वर्मा ही है। मामले में अजीबो-गरीब मोड़ सूचना अधिकार अधिनियम से मिली सूचना के बाद हुआ है।सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत ब्लॉक बीजूआ के खंड बिकास अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना में कहा गया है कि हरीराम नाम का कोई आदमी हर दुआ में नहीं रहता है और न ही हर दुआ में मृत्यु ही हुई है।
और न ही किसी अधिकारी ने मृत्यु प्रमाणपत्र ही जारी किया गया है।तो फिर प्रधान रामकिशुन ने किसका और कैसे जारी कर दिया मृत्यु प्रमाणपत्र?जब हर दुआ के अभिलेखों में हरीराम का नाम दर्ज नहीं है तो परिवार रजिस्टर की नकल कहा से और किसने जारी की?कैसे पिंकी पुत्री हरिराम बन गई? किसी अभिलेख में हरीराम मृतका दर्ज नहीं है तो फिर वरासत के समय लगाए गए दस्तावेजों को किसने किया तैयार?और किस प्रमाणित जानकारी के अनुसार जगन्नाथ और दर्शन ने न्यायालय में दी झूठी गवाही और न्यायालय तहसील दार न्यायिक को किया गया गुमराह?
किस प्रमाणित साक्ष्य के आधारित लेखपाल ने लगाई जांच रिपोर्ट? इन यक्ष प्रश्नों के उत्तर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के पास ढूंढे नहीं मिल पा रहे हैं।सभी अपनी-अपनी गर्दन बचाते नजर आ रहे हैं। पिंकी देवी का कहना कहा तक सत्य है कि उनके पिता हरीराम है।सूत्रों और साक्ष्यों के आधार पर पिंकी देवी पत्नी बिंदर पाल के पिता झब्बू है और पिंकी देवी का मायका नौरंगाबाद में है। हरीराम जाति प्रमाण पत्र के अनुसार अनुसूचित जाति (धोबी) है जबकि पिंकी देवी पत्नी बिंदर पाल पिछड़ी जाति के( मुराउ) बिरादरी के है तो कैसे पुत्री हो सकते है? पिंकी देवी के दो पिता कैसे हो सकते है?
सूचना अधिकार अधिनियम से मिली जानकारी भ्रस्टाचार और फर्जीवाड़ा की पोल खोलने को काफी है।पीड़ित द्वारा टेलीफोन से दी गई जानकारी के अनुसार वह सभी पर्याप्त सबूतों के साथ एक दो दिन में पुलिस अधीक्षक खीरी से मुलाकातें कर मुकदमा पंजीकृत किए जाने की मांग करेगा।और जिलाधिकारी खीरी के समक्ष प्रस्तुत करेगा सभी साक्ष और जीवित होने के प्रमाण और फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल और कानूनगो के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराए जाने का आदेश किए जाने की मांग करेगा।शिकायत की जांच कर रहे चौकी प्रभारी कुकुरा अबलीश पवार ने बताया सभी आरोपी लोगों बुलाया गया है मामले में दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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