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कुशीनगर : रेलवे का फॉर्मूला: तारीख बढ़ाओ, भुगतान टालो!
डेट बढ़ायेगे, रेलवे जमीन भुगतान की तारीख नही बतायेगे? छितौनी–तमकुही रेल परियोजना में किसानों का धैर्य टूटने की कगार पर
प्रमोद रौनियार
कुशीनगर। वर्षों से अधर में लटकी छितौनी–तमकुही रोड रेल परियोजना अब जमीन पर तो उतरती दिख रही है, लेकिन मुआवजा भुगतान के मोर्चे पर प्रशासनिक उदासीनता ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जमीन अधिग्रहण की पूरी धनराशि राजस्व विभाग को मिल जाने के बावजूद प्रभावित किसानों को अब तक उनका हक नहीं मिला है, जिससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ने 29 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर पहले चरण में ग्राम पंचायत जटहा के 28 और एकवनही उर्फ भागवतपुर के 18 किसानों को 15 फरवरी 2026 तक कागजात जमा करने का निर्देश दिया था। दूसरे चरण में ग्राम पंचायत जरार के 42 किसानों को नोटिस तामील कराया गया। ज्ञात हो कि खड्डा तहसील के ग्राम पंचायत कटाई भरपुरवा और पडरौना तहसील के छह गांवों के किसानों को भी मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में शामिल किया गया। फॉर्म 41/45 और 1359 भरकर जमा करने के बाद भुगतान की व्यवस्था तय की गई थी।
लेकिन हकीकत यह है कि तय समय सीमा गुजर जाने के बाद भी किसानों के हाथ न तो जरूरी कागजात पहुंचे और न ही भुगतान की कोई स्पष्ट तारीख घोषित हुई। किसान रोजाना एडीएम (न्यायिक), तहसील, लेखपाल और अन्य राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार नई तारीख का आश्वासन मिलता है, लेकिन नतीजा शून्य है।
पीड़ित किसानों का दर्द साफ झलकता है "सरकार ने जमीन ले ली, लेकिन भुगतान कब मिलेगा, यह कोई बताने वाला नहीं है"। दफ्तरों में बैठे बाबू और लेखपाल किसानों की मजबूरी से बेपरवाह नजर आ रहे हैं।
बाबुओं द्वारा बताया जा रहा है तारीख बढ़ा दी गई है, और कहते है चिंता करने की कोई बात नही है, मगर सवाल उठना लाजमी है पहले नोटिस दिया गया तो डेट बताया गया, जब बढ़ाया गया तो तारीख नही बताया जा रहा है। तारीख क्यो और किसकी कमी से बढ़ाया जा रहा है ये बड़ा सवाल है?
आरोप है कि फाइलें जानबूझकर लटकाई जा रही हैं, जिससे किसानों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक तीनों तरह की मार झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह देरी अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। एक तरफ सरकार विकास परियोजना का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी विकास की कीमत चुकाने वाले किसान अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
अब प्रभावित किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान की स्पष्ट तिथि घोषित कर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। सबसे बड़ा सवाल यही है — जब जमीन ली जा चुकी है और धनराशि जारी हो चुकी है, तो आखिर किसानों का मुआवजा कब मिलेगा?

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