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एंटी करप्शन टीम ने बारा थाना प्रभारी को घूस लेते रंगे हाथ किया गिरफ्तार
बारा (प्रयागराज )प्रयागराज में बारा थाने के प्रभारी निरीक्षक को एंटी करप्शन टीम ने 75 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर ने एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर आरोपी पक्ष से रकम मांगी थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए टीम ने थाने के भीतर ही प्लानिंग की और लेनदेन के दौरान दबोच लिया। मौके पर लिखा-पढ़ी और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर मूल रूप से वाराणसी के सारनाथ का रहने वाला है। 2012 में दरोगा से प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बना था।इंस्पेक्टर ने थाने में ही घूस लेकर आने को बुलाया भदोही के सुरियावां थाना के लुकमानपुर निवासी संतोष कुमार दुबे के खिलाफ बारा थाने में एक मुकदमा दर्ज था। उसने एंटी करप्शन में शिकायत की थी कि इस मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए प्रभारी इंस्पेक्टर ने उनसे 75 हजार रुपए घूस मांगी थी। एंटी करप्शन की ओर से इस शिकायत पर शुरुआती जांच कराई गई। जांच में इंस्पेक्टर की ऐसी की कार्यशैली मिली। इसके बाद इंस्पेक्टर को पकड़ने की योजना बनाई गई। तय योजना के मुताबिक बुधवार को दोपहर में 2:40 बजे शिकायतकर्ता संतोष कुमार दुबे रुपए लेकर पहुंचा।
फोन से बात करने पर आरोपी इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर ने संतोष कुमार दुबे को थाने में अपने ऑफिस में बुलाया। जैसे ही इंस्पेक्टर ने 75 हजार रुपए थामे, एंटी करप्शन की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लियाशिकायत के बाद शाहगंज थाने से हटाए गए थे।एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। फिलहाल इंस्पेक्टर को घूरपुर थाने ले जाया गया है, जहां उसके खिलाफ लिखा-पढ़ी की जा रही है। विनोद कुमार सोनकर इससे पहले प्रयागराज में खुल्दाबाद थाने का भी प्रभारी निरीक्षक रह चुका है।खुल्दाबाद थाने से इसे शाहगंज थाना प्रभारी बनाया गया था, जहां से इसे शिकायतों पर हटाया गया था। पुलिस लाइन में तैनात किया गया था। करीब 6 महीने पहले इसे बारा थाने का प्रभारी बनाया गया था।
पीड़ित बोला- मुझे जबरन एक मुकदमे में नामजद कर दिया
शिकायत करने वाले संतोष कुमार दुबे का कहना है कि आरोपी इंस्पेक्टर ने जबरन एक मुकदमे में उनका नाम शामिल कर दिया था। उस मुकदमे में वह नामजद नहीं थे, लेकिन विवेचना के दौरान शामिल होने का दावा कर उनका नाम मुकदमे में जोड़ दिया था। नाम हटाने के एवज में उनसे पहले एक बार पैसे लिए भी थे, अब दोबारा 75 हजार रुपए की मांग कर रहे थे। इसके बाद ही उन्होंने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन की थी।

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