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बीजेपी राहुल को जेल भेजना चाहती थी, कर्नाटक HC ने मानहानि केस को ही वैध नहीं माना
ब्यूरो प्रयागराज। कर्नाटक बीजेपी ने जिस मानहानि के केस में राहुल गांधी को जेल भेजने की फिराक में थी, वो दरअसल क़ानूनी रूप से वैध ही नहीं था। कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार को बीजेपी द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के केस को खारिज कर दिया। इस तरह कोर्ट ने मानहानि केस में राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। यह केस 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की तरफ़ से छपे विज्ञापनों को लेकर था। इन विज्ञापनों में तब की बीजेपी सरकार को '40% सरकार' कहा गया था और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव ने यह फ़ैसला राहुल गांधी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। इस याचिका में उन्होंने मानहानि केस की क़ानूनी वैधता पर सवाल उठाया था। बीजेपी की स्टेट यूनिट ने जून 2023 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में कंप्लेंट दर्ज कराई थी। कोर्ट ने फ़ैसले में कहा कि राहुल गांधी के ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी रखना लीगल एब्यूज माना जाएगा। कोर्ट ने केस को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह राजनीतिक आलोचना थी, जो लोकतंत्र में सामान्य है। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना अपराध नहीं है।
2023 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। कांग्रेस ने 5 मई 2023 को राज्य के सभी बड़े अख़बारों में पूरे पेज का विज्ञापन छपवाया। इस विज्ञापन का टाइटल था 'करप्शन रेट कार्ड'। इसमें दावा किया गया कि 2019-2023 की बीजेपी की सरकार ने ठेकेदारों से 40% कमीशन लिया और राज्य की जनता से 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा लूटे।
इस विज्ञापन को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार और तब विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने जारी किया था। राहुल गांधी ने इसे अपने एक्स अकाउंट पर भी शेयर किया था। बीजेपी को यह बात बुरी लगी। उन्होंने जून 2023 में बेंगलुरु की मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई।

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