अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य तैनाती, F-35 और B-2 विमानों की मौजूदगी से ईरान पर बढ़ा दबाव
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।
खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान शामिल हैं।
F-35: अमेरिका का अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर
F-35 दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। इसकी प्रमुख खूबियां—
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रडार से बचने की क्षमता (स्टेल्थ टेक्नोलॉजी)
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लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता
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सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से लैस
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एक साथ कई सैन्य यूनिट्स के साथ डेटा शेयर करने में सक्षम
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एडवांस मिसाइल सिस्टम से लैस
अमेरिका के पास ऐसे 300 से ज्यादा विमान हैं, जिनमें से कुछ को हाल ही में मिडिल ईस्ट में भेजा गया है।
B-2 बॉम्बर की तैनाती का भी संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका B-2 जैसे रणनीतिक बॉम्बर विमानों का इस्तेमाल कर सकता है। B-2 बॉम्बर लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होता है।
ईरान ने भी दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने संकेत दिया है कि अगर देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो ईरान भी जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान ने अपने सैन्य बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े सैन्य टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के कड़े बयानों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

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