असम के उत्तर करीमगंज में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
स्वतंत्रता के बाद पहली बार क्षेत्र के लोगों ने ज़मीन से जुड़ी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय महिला मुन्नी छेत्री को प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है
श्रीभूमि : असम में आगामी 26वीं विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के संभावित प्रत्याशी अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच उत्तर करीमगंज क्षेत्र में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा ने जोर पकड़ लिया है।मतदाताओं के एक वर्ग की राय है कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार जमीनी स्तर से जुड़ी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय किसी महिला को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में समाजसेवी मुन्नी छेत्री का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिन्हें क्षेत्र में एक संभावित मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मुन्नी छेत्री पिछले कई वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और जरूरतमंद परिवारों की सहायता जैसे मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य और आम जनता से जुड़ाव के कारण उन्होंने क्षेत्र में व्यापक समर्थन हासिल किया है।जानकारी के मुताबिक, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से उत्तर करीमगंज सीट के लिए टिकट की मांग की है। हालांकि अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बेरोजगारी, बाढ़ नियंत्रण, आधारभूत संरचना और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे स्थानीय मुद्दे चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल क्षेत्र में सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिलता, तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं, हालांकि इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।बराक घाटी में भी महिला दावेदारों को लेकर चर्चा जारी है। बड़खला, काटिगढ़ा, हाइलाकांडी, पाथारकांडी और उत्तर करीमगंज समेत विभिन्न क्षेत्रों से महिला उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि इस बार महिला प्रतिनिधित्व एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह धारणा व्यक्त की जा रही है कि अब तक उत्तर करीमगंज से किसी महिला को प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिला है। ऐसे में यदि किसी महिला उम्मीदवार को टिकट दिया जाता है, तो इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा सकता है।क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं—खराब सड़कें, जल निकासी की दिक्कतें और बेरोजगारी—अब भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। मतदाताओं का एक वर्ग मानता है कि इन समस्याओं को समझने और उठाने वाले जमीनी कार्यकर्ता को इस बार अवसर मिलना चाहिए। मुन्नी छेत्री का नाम इसी संदर्भ में चर्चा में है।
सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उनके समर्थन में आवाजें उठ रही हैं, वहीं कुछ स्थानीय महिलाओं ने भी प्लेकार्ड के माध्यम से महिला प्रतिनिधि की मांग रखी है।अब सबकी निगाहें आगामी टिकट वितरण और उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार उत्तर करीमगंज को स्वतंत्रता के बाद पहली बार जमीनी स्तर से उभरी किसी महिला को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है या नहीं देखने वाली बात है।

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