अमरोहा में 'खाकी' और 'काला कोट' में हिंसक टकराव

दरोगा ने जज के चैंबर में छुपकर बचाई जान

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ब्यूरो प्रयागराज- अमरोहा जिले के हसनपुर तहसील कोर्ट परिसर में पुलिस और वकीलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसने स्थानीय स्तर पर खासी हलचल मचा दी. यह घटना 'वर्दी' और 'काला कोट' के बीच टकराव का एक और उदाहरण बन गई है. पुलिस पक्ष के अनुसार, हसनपुर कस्बा चौकी के प्रभारी राम प्रकाश सिंह एक महिला उत्पीड़न मामले में पीड़िता का बयान दर्ज करने की न्यायिक अनुमति लेने कोर्ट पहुंचे थे.

बाहर निकलते ही अधिवक्ता मनीराम और उनके साथियों ने उन्हें रोका. पुलिस का आरोप है कि वकीलों ने दरोगा पर हमला बोल दिया, मारपीट की और जातिगत गालियां भी दीं. स्थिति बिगड़ने पर दरोगा ने पास के एक न्यायिक अधिकारी के चैंबर में शरण ली, जहां से बाद में अतिरिक्त पुलिस बल ने उन्हें सुरक्षित निकाला. इस आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता मनीराम समेत तीन नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. वहीं, वकीलों की तरफ से पूरी कहानी उलट है.

अधिवक्ता मनीराम का दावा है कि दरोगा राम प्रकाश से उनकी पुरानी व्यक्तिगत रंजिश चल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि दरोगा ने कोर्ट परिसर में ही उनसे बदतमीजी की, पुराना विवाद सुलझाने से इनकार करने पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी. बीच-बचाव करने आए वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार शर्मा का कहना है कि दरोगा ने उन्हें धक्का देकर गिराया और घसीटा, जिससे हाथों-घुटनों में चोटें आईं.

वकीलों का मानना है कि इससे न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है. जानकारी के मुताबिक, यह विवाद नया नहीं है. जनवरी में डीजे की तेज आवाज पर हुए एक छोटे विवाद से दोनों पक्षों में खटास शुरू हुई थी, जो अब इस स्तर तक पहुंच गई.

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घटना के बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई और भारी पुलिस बल तैनात किया गया. बार एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि अगर दरोगा के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा. हालांकि, बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की भी खबरें आईं, जिससे तनाव कुछ कम हुआ. पुलिस अभी दोनों पक्षों के बयानों की गहराई से जांच कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके. यह घटना एक बार फिर पुलिस और वकील समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है.

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