ऐतिहासिक धरती मऊ कला में बौद्ध महोत्सव की धूम बुद्ध और अशोक के आदर्शों से ही बनेगा सशक्त भारत

संविधान और सम्राट अशोक की परिकल्पना अविनाश कुशवाहा

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समता और न्याय पर आधारित था प्राचीन भारत भंते बुद्ध ज्योति

अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -

जिले की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत को संजोए हुए धरती मऊ कला में वृहस्पतिवार को वार्षिक बौद्ध महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के शांति संदेश और सम्राट अशोक के गौरवशाली शासन को याद करते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

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महोत्सव के मुख्य अतिथि परम पूज्य भंते बुद्ध ज्योति जी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास भगवान बुद्ध और सम्राट अशोक के महान आदर्शों पर टिका है। उन्होंने कहा कि उस दौर के वैभवशाली भारत में न कोई शोषक था और न कोई शोषित। समता, स्वतंत्रता और न्याय ही राष्ट्र की पहचान थी। आज हमें पुनः उसी मानवीय संवेदना और बंधुत्व की भावना को जागृत करने की आवश्यकता है।

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विशिष्ट अतिथि बबलू बिंद ने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रियदर्शी सम्राट अशोक ने ही भगवान बुद्ध के विचारों को वैश्विक स्तर पर फैलाया। इन्हीं मानवीय मूल्यों और वैज्ञानिक सोच के कारण ही प्राचीन काल में भारत को 'विश्व गुरु' के रूप में पहचान मिली। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक और पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने सम्राट अशोक और बाबा साहब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों के सामंजस्य पर बात की।

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उन्होंने कहा सम्राट अशोक का ध्येय था कि समस्त प्रजा मेरी संतान है। ठीक इसी मानवीय परिकल्पना को बाबा साहब ने भारतीय संविधान में पिरोया है, ताकि देश के हर नागरिक को समानता का अधिकार मिल सके। बौद्ध महोत्सव में आदिवासी छात्र-छात्राओं द्वारा विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इन नाटकों और गीतों के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार किया गया। कार्यक्रम में डॉ. वीरेंद्र सिंह, कृपा शंकर चौहान, रामनरेश और पूजा सहित कई विद्वान वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का कुशल संचालन रवि मौर्य एवं सह-संचालन कपिजल मौर्य द्वारा किया गया। अंत में समिति के संस्थापक अध्यक्ष सुजीत कुमार मौर्य ने आए हुए सभी अतिथियों और जनमानस का आभार व्यक्त किया। महोत्सव को सफल बनाने में नामवर कुशवाहा, सूबेदार कुशवाहा, श्रीनाथ धांगर, अनिल मौर्य, बुद्धि नाथ मौर्या, संजय कुशवाहा, राम सिंह यादव, राधा रमन सिंह सहित हजारों की संख्या में क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।

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