सोनभद्र मानवता की मिसाल, दुर्घटना में देवदूत बने रमेश यादव ,ओबरा में दुःख के साथी बने पूर्व नगर अध्यक्षा
जनपद की पावन धरती पर ऐसे वीर सपूतों से गौरवान्वित , पेश किया मानवता की मिशाल
अजित सिंह /राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
दुर्घटना के समय अक्सर अपने भी साथ छोड़ जाते हैं, लेकिन मानवता की डोर थामे कोई पराया व्यक्ति देवदूत बनकर सामने आता है। सोनभद्र जनपद में हाल ही में ऐसी ही दो मिसालें देखने को मिलीं, जिन्होंने समाज में परहित सरिस धरम नहिं भाई के संदेश को जीवंत कर दिया है। पहली घटना जनपद के राजगढ़ क्षेत्र की है। यहाँ सुरेश पटेल नामक व्यक्ति अपने रिश्तेदार के घर जा रहा था, तभी वह गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया।

Read More ठंड व घने कोहरे से बच्चों को रखें पूरी तरह सुरक्षित लापरवाही पड़ सकती है भारी : डॉ. प्रभाकर सिंहऐसे समय में जब राहगीर अक्सर अनहोनी के डर से बचकर निकल जाते हैं, जल पुरुष के नाम से विख्यात रमेश सिंह यादव वहाँ से गुजर रहे थे। उन्होंने बिना समय गंवाए मानवता का परिचय दिया और घायल सुरेश पटेल की मदद की। उन्होंने अपनी देखरेख में तत्काल एंबुलेंस बुलाकर उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुँचाया। उनकी इस त्वरित सक्रियता से घायल को समय पर उपचार मिल सका और एक जान बच गई। वहीं दूसरी ओर ओबरा नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्षा का नाम आज सेवा और भरोसे का पर्याय बन चुका है।
ओबरा और आसपास के क्षेत्रों में उन्हें केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि जनता के दुःख के साथी के रूप में पहचाना जाता है। उनकी समाज सेवा की कुछ अनूठी विशेषताएँ उन्हें खास बनाती हैं। यदि नगर के किसी भी कोने से सूचना आती है कि किसी व्यक्ति का देहांत हो गया है, तो लोग बेझिझक इनका दरवाजा खटखटाते हैं। अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की व्यवस्था से लेकर अन्य जरूरी आर्थिक सहायता तक, वे सदैव तत्पर रहते हैं। बचपन से ही स्थानीय स्टेडियम को अपना दूसरा घर समझने वाले एक राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं।
यही कारण है कि क्षेत्र में कहीं भी खेलकूद या क्रिकेट प्रतियोगिता हो, उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में सम्मान के साथ बुलाया जाता है। खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए वे सदैव उपस्थित रहते हैं। खिलाड़ी वाली वही ऊर्जा और अनुशासन अब उनकी समाज सेवा में स्पष्ट झलकती है। वे सभी धर्मों और समुदायों के त्योहारों में मिलजुल कर शामिल होते हैं और सबको साथ लेकर चलने का संकल्प दोहराते हैं। आसपास क्षेत्र में कोई भी समस्या हो, महज़ एक फोन कॉल पर वे मौके पर पहुँचकर सहायता सुनिश्चित करते हैं।
ओबरा नगर की जनता का उन पर यह अटूट विश्वास है कि संकट के समय चाहे कोई साथ दे न दे, उनका यह निस्वार्थ समाजसेवी उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उनकी छवि एक ऐसे अभिभावक की है जो राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संबंधों को प्राथमिकता देता है। सोनभद्र की पावन धरती ऐसे ही सपूतों से गौरवान्वित है। जहाँ एक तरफ रमेश सिंह यादव की तत्परता ने एक परिवार का चिराग बुझने से बचाया, उन्होंने यह साबित कर दिया कि पद पर रहें या न रहें, सेवा का संस्कार कभी नहीं बदलता। उनके समर्थकों का कहना है कि विश्वास ही संबंधों का आधार है, और इसी अटूट विश्वास के सहारे ओबरा की जनता उन्हें अपना सच्चा प्रतिनिधि और रक्षक मानती है।

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