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बलिया में पॉक्सो एक्ट का दोषी करार, नाबालिग से अप्राकृतिक दुष्कर्म मामले में 25 साल की सजा
जनपद की पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से अप्राकृतिक दुष्कर्म के एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है
बलिया। जनपद की पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से अप्राकृतिक दुष्कर्म के एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-8 ने अभियुक्त अजय पासवान उर्फ गुड़मुड़िया को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 29 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अदालत ने अभियुक्त अजय पासवान उर्फ गुड़मुड़िया, निवासी वार्ड संख्या-12, कस्बा सहतवार, थाना सहतवार, जनपद बलिया को धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया। इस धारा में उसे 25 वर्ष का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
इसके अलावा, धारा 323 भादवि में 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये का अर्थदंड, धारा 504 भादवि में 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये का अर्थदंड तथा धारा 506 भादवि में 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये का अर्थदंड भी सुनाया गया है। सभी अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में अलग-अलग अवधि का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया है।
यह मामला 12 अक्टूबर 2023 का है, जब अभियुक्त द्वारा वादी के नाबालिग पुत्र के साथ मारपीट कर अप्राकृतिक दुष्कर्म किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई थी। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर थाना सहतवार में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्यवाही शुरू की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
यह सजा उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन कनविक्शन" के तहत प्रभावी मॉनिटरिंग और अभियोजन विभाग की सशक्त पैरवी का परिणाम मानी जा रही है। मामले में बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की भूमिका सराहनीय रही। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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