शास्त्रीनगर–बेलवनिया गंडक पुल पर संकट, बगहावासियों में आक्रोश
आंदोलन की चेतावनी
बगहा। शास्त्रीनगर (बगहा) और बेलवनिया को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित गंडक पुल प्रोजेक्ट पर ग्रहण लगने की खबर से बगहा सहित आसपास के क्षेत्रों में निराशा और आक्रोश व्याप्त है। मीडिया में चल रही चर्चाओं के अनुसार यदि यह योजना रद्द या परिवर्तित होती है तो इसे बगहा और सुदूरवर्ती क्षेत्रों के हितों के खिलाफ गलत निर्णय माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पर सभी माननीय जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का मत है कि रतवल–धनहा पुल का चौड़ीकरण स्वागतयोग्य है, लेकिन यह शास्त्रीनगर–बेलवनिया पुल की कीमत पर नहीं होना चाहिए। बगहा नगर के सामने गंडक नदी पर एक पुल अत्यंत आवश्यक है, जो बाल्मीकिनगर, हरनाटांड, सेमरा चिउटाहा, दोन जैसे सुदूर आदिवासी बहुल क्षेत्रों के साथ-साथ बगहा नगर को सीधे जोड़ सके।
यह पुल खड्डा, छितौनी, पनीयहवा, जटहा और पिपरासी के लोगों को अनुमंडल तथा भविष्य के जिला मुख्यालय से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि भविष्य में वन विभाग द्वारा मदनपुर–पनियहवा सड़क को बंद कर दिया गया तो इन क्षेत्रों के निवासियों को आवागमन के लिए अत्यंत लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिसकी व्यावहारिक कठिनाइयों का अंदाजा स्थानीय अधिकारियों को नहीं है।
स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट किया है कि शास्त्रीनगर–बेलवनिया पुल योजना को रद्द किए जाने के किसी भी निर्णय का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि मदनपुर–पनियहवा सड़क का कोई भी विकल्प इसी क्षेत्र के आसपास होना चाहिए, न कि पहले से मौजूद रतवल–धनहा सेतु पर निर्भरता बढ़ाकर।
इस मुद्दे पर जदयू नेता राकेश सिंह, भाजयुमो अध्यक्ष विशाल पाण्डेय, शैलेश यदुवंशी, प्रमोद रौनियार, रविकेश पाठक, अजय साहनी, अमेरिका महतो, जुगनू आलम, रविंद्र कुमार, राजेंद्र कुशवाहा सहित अन्य लोगों ने निर्णय के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है। नेताओं ने कहा कि शीघ्र ही एक संघर्ष समिति का गठन कर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा, ताकि बगहा और आसपास के क्षेत्रों के हितों की रक्षा की जा सके।


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