यही हैं विद्वेष व हिंसा से भारत को बदनाम करने वाली शक्तियां?
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'क्रिसमस' प्रत्येक वर्ष की भांति गत 25 दिसंबर को भी पूरे विश्व में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दुबई की मशहूर एयरलाइन एमिरेट्स ने एक अनोखा वीडियो जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि उनके बड़े विमान एयरबस ए 380 को सांता क्लॉज़ की जादुई स्लेज में बदल दिया गया है। इस विमान को "स्लेज 380" का नाम दिया गया है। इस वीडियो में ए380 को रुडॉल्फ़ रेनडियर की तरह लाल नाक और बड़े सींग लगाए गए हैं, और उपहारों से भरी एक विशाल स्लेज विमान से जुड़ी दिखती है।
विमान रनवे पर दौड़ता है और आसमान में उड़ान भरता है, जैसे सांता दुनिया भर में गिफ़्ट बांटने जा रहा हो। एमिरेट्स ने इस सीज़न में यात्रियों को ख़ास तोहफ़े भी दिए, जिसमें फ़ेस्टिव ड्रिंक्स, थीम्ड मिठाइयां, विंटर-स्टाइल लाउंज और लिमिटेड एडिशन क्रिसमस गिफ़्ट शामिल हैं। वैसे भी चूँकि क्रिसमस मनाने के साथ ही नये वर्ष के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं इसलिये भी दुनिया के सभी देश व सभी धर्मों व वर्गों के लोग भी क्रिसमस मनाने में अपनी दिलचस्पी दिखाते हैं।
भारत में भी लगभग 2.8 करोड़ ईसाई रहते हैं जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 2.3% है। ईसाई समुदाय भारत में तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। लिहाज़ा यहाँ भी ईसाई समुदाय क्रिसमस, गुड फ़्राइडे व नव वर्ष जैसे अपने सभी त्यौहार सदियों से मनाते आ रहे हैं। वैसे भी ब्रिटिशकाल में भारत में अंग्रेज़ों ने जहां विकास सम्बन्धी तमाम इबारतें लिखीं वहीँ उनके शासन में देश भर में अनेक बड़े व ऐतिहासिक चर्च ,स्कूल व अस्पताल भी निर्मित किये गये।
आज भी क्रिश्चियन मिशनरी देश की शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान अदा कर रही है। इन सब वास्तविकताओं को दरकिनार कर देश का एक दक्षिणपंथी वर्ग ऐसा है जिसके संस्कारों में ही धर्म विशेष के लोगों से नफ़रत करना व उनके धार्मिक रीति रिवाजों व परंपराओं का विरोध करना शामिल है। नकारात्मकता की सोच से भरे इसी विचारधारा के लोग विगत कई वर्षों से क्रिसमस त्यौहार मनाये जाने का विरोध करते आ रहे हैं। जबकि 'सर्व धर्म समभाव ' जैसे गांधीवादी विचारों का अनुसरण करने वाला देश का आम नागरिक सभी धर्मों के त्योहारों व परंपराओं व रीति रिवाजों में ख़ुशी से शरीक होकर प्रत्येक उत्सव का आनंद लेना चाहता है साथ ही एक दूसरे धर्म के लोगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाना चाहता है।
नफ़रत,नकारात्मकता,संकीर्णता व साम्प्रदायिक वैमनस्य की सोच से भरे इन्हीं तत्वों ने गत क्रिसमस के अवसर पर पूरे देश में विभिन्न चर्चों व सार्वजनिक स्थलों पर ऐसा तांडव किया जिसकी चर्चा देश के मीडिया में कम परन्तु विदेशी मीडिया में ज़्यादा हुई। इस दौरान भारत के विभिन्न राज्यों में ईसाई समुदाय के विरुद्ध हुई घटनाओं में तोड़फोड़, हमले और उत्पात की कई रिपोर्ट्स सामने आईं। उदाहरण स्वरूप छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मैग्नेटो मॉल में भीड़ ने क्रिसमस डेकोरेशंस में तोड़फोड़ की, जिसमें लाखों का नुक़्सान हुआ। जबकि कांकेर ज़िले में दो चर्च जला दिये गए और कई ईसाई घरों को निशाना बनाया गया।
इसी तरह असम के नालबाड़ी में सेंट मैरी स्कूल में वी एच पी कार्यकर्ताओं ने क्रिसमस बैनर्स और डेकोरेशंस को जलाया व स्कूल के पास की दुकानों पर भी हमले किये । इसी तरह केरल के पलक्कड़,चारूमूडू व पुडुसेरी में बच्चों के कैरोल ग्रुप पर हथियारों से हमला किया गया जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इसी तरह मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी कुछ इलाक़ों में ईसाई धर्मावलंबियों की प्रार्थना सभाओं और धार्मिक आयोजनों के दौरान मारपीट और हंगामा किए जाने की ख़बर है जबकि झाबुआ में प्रेयर मीटिंग में व्यवधान डाला गया जिसमें एक नेत्रहीन महिला पर हमला किया गया । उत्तर प्रदेश में सेंट अल्फोंसस कैथेड्रल के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ लाउडस्पीकर पर बजाया गया,लखनऊ में कैथेड्रल सर्विस में तेज़ आवाज़ से धार्मिक भजन बजाए गये ।
इसी प्रकार राजस्थान के जोधपुर और नागौर में एक स्कूल में क्रिसमस बैनर्स तोड़े गए,नागौर में युवाओं ने स्कूल के सामने मंदिर का होने का बहाना बनाकर तोड़फोड़ की। दिल्ली के लाजपत नगर व पूर्वी दिल्ली में सेंटा कैप पहनी महिलाओं और बच्चों को बाज़ार से भगाया गया एक बाज़ार में ज़बरदस्त उत्पात मचाया गया। उत्तराखंड के हरिद्वार में एक होटल में क्रिसमस संबंधी एक आयोजन को रद्द करना पड़ा। जबकि ऋषिकेश में एक प्रार्थना सभा में व्यवधान डाला गया और जीसस और मैरी का अपमान करते हुये उन्हें अपशब्द कहे गए। ओडिशा के पुरी में सेंटा कैप बेचने वाले ग़रीब परिवार को धमकाया और भगाया गया जबकि महाराष्ट्र में मुंबई के काशीमीरा में क्रिसमस प्रोग्राम रोका गया तथा वहां मौजूद बच्चों से हिन्दू धर्म से जुड़े नारे लगवाए गये। देश भर में इस तरह कि 60 से भी अधिक घटनाओं के समाचार हैं और इन प्रत्येक घटनाओं का विरोध करने वालों में लगभग हर जगह संघ,बजरंग दल, वी एच पी,भाजपा व इनके सहयोगी अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों के लोगों के शामिल होने की ख़बरें हैं।
ब्रिटेन से लेकर टर्की तक और कई अरब देशों का मीडिया भारत में क्रिसमस के अवसर पर मचाये गये तांडव को लेकर भारत को किस नज़र से देख रहा है ? बड़ा आश्चर्य है कि इस अवसर पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के कैथेड्रल चर्च पहुँचते हैं और इससे जुड़ी कई तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पोस्ट में साझा करते हुये लिखते हैं कि "दिल्ली में द कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन में क्रिसमस की सुबह की सर्विस में शामिल हुआ। सर्विस में प्यार, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश झलका।
क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और भाईचारा लाए। " सवाल यह है कि नरेंद्र मोदी भी संघ की उसी पाठशाला के 'विद्यार्थी' रहे हैं जिसमें संघ संस्थापक व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक गोलवलकर कम्युनिस्ट विचारधारा,ईसाई और मुसलमान जैसे समुदाय को भारत की राष्ट्रीय पहचान और हिंदू संस्कृति के लिए ख़तरा समझते थे। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल्ली के कैथेड्रल चर्च पहुंचकर शांति व प्रेम का सन्देश देना कितना वास्तविक है और कितना औपचारिक या दिखावा ? और यदि वास्तव में मोदी को क्रिसमस के अवसर पर करुणा का शाश्वत संदेश झलकते दिखाई दिया तो उसी विचारधारा के लोगों द्वारा हिंसा और उद्दंडता का ऐसा साम्प्रदायिक प्रदर्शन क्यों जिससे दुनिया में देश की बदनामी हो ? दरअसल यही हैं विद्वेष व हिंसा से भारत को बदनाम करने वाली शक्तियां?
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