दो बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियों और बिजली परियोजना के बीच अंधेरे में अमर डम-डम गुफा, विकास की राह देख रहे श्रद्धालु

मूलभूत सुविधाओं से वंचित शिव पार्वती मन्दिर, बुनियादी सुविधाओं का टोटा

दो बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियों और बिजली परियोजना के बीच अंधेरे में अमर डम-डम गुफा, विकास की राह देख रहे श्रद्धालु

अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-

 4 मार्च 1989 को मिर्जापुर से पृथक होकर बना सोनभद्र जिला अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के लिए विश्व विख्यात है। भारत का यह इकलौता जनपद है जिसकी सीमाएं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार को स्पर्श करती हैं। प्राकृतिक संपदा और औद्योगिक विकास के बावजूद, जिले की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक धरोहर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।

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हैरानी की बात यह है कि डाला क्षेत्र में एक तरफ अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री और दूसरी तरफ एसीसी (ACC) सीमेंट फैक्ट्री जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। वहीं पास ही ओबरा में देश को रोशन करने वाली विशाल बिजली परियोजना है, जिसे 'ऊर्जा की राजधानी' कहा जाता है। इन दो बड़ी फैक्ट्रियों और बिजली के पावर हाउस के बीच स्थित सलाई बनवां का शिव-पार्वती अमर डम-डम गुफा मंदिर आज भी एक पक्की सड़क और बिजली के कनेक्शन के लिए संघर्ष कर रहा है।

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यह गुफा मंदिर अपनी दिव्यता और तपस्वियों की साधना स्थली के रूप में विख्यात है। श्रद्धालु यहाँ दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं। विडंबना यह है कि जहाँ केंद्र और प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं इस प्राचीन स्थल तक पहुँचने का मार्ग आज भी बदहाल है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, शासन ने यहाँ रैन बसेरा, पानी के लिए बोरिंग और बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाएं तो दी हैं, लेकिन मुख्य बुनियादी जरूरतें—बिजली और सड़क—को नजरअंदाज कर दिया गया है।

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बिना बिजली के रैन बसेरा और बिना सुगम सड़क के ये बेंच श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह उपयोगी साबित नहीं हो रहे हैं। हर-हर महादेव सेवा समिति के अध्यक्ष भानु प्रताप ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा सोनभद्र से उत्पन्न बिजली से आधा देश रोशन होता है, लेकिन दुःखद है कि यहाँ का यह पवित्र मंदिर वर्षों से अंधेरे में डूबा है। बरसात के दिनों में रास्ता कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता है, जिससे वृद्धों, महिलाओं और बच्चों को मंदिर पहुँचने में भारी शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय ग्रामीणों और सेवा समिति ने जिला प्रशासन से तीन मुख्य मांगें की हैं।मंदिर मार्ग को तत्काल गड्ढा मुक्त कर पक्का बनाया जाए। मंदिर और गुफा क्षेत्र को बिजली से जोड़कर प्रकाश की व्यवस्था की जाए। सफाई कर्मियों की नियुक्ति स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थायी सफाई व्यवस्था हो। यदि प्रशासन इन बुनियादी कमियों को दूर कर दे, तो इस ऐतिहासिक गुफा मंदिर की सुंदरता निखर उठेगी। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास और राजस्व में भी वृद्धि होगी। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस ऊर्जा राजधानी के अंधेरे को दूर कर श्रद्धालुओं की राह आसान बनाई जाएगी?

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