नववर्ष के स्वागत में देशभर में उमड़ा उल्लास, पहाड़ों की ओर बढ़ता सैलानियों का सैलाब, विंटर कार्निवल, संगीत, रौशनी और जिम्मेदार जश्न का संदेश
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देश में नए साल के स्वागत की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं। वर्ष 2025 के विदा होने और 2026 के आगमन को यादगार बनाने के लिए लोग अभी से योजनाएं बना चुके हैं। होटल बुकिंग, ट्रैवल प्लान, पार्टी पैकेज और विंटर कार्निवल की गहमागहमी ने पर्यटन स्थलों को जीवंत कर दिया है। महानगरों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक, हर जगह जश्न का माहौल है। खासतौर पर ठंडे राज्यों की ओर पर्यटकों का रुझान इस बार कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, कसौली, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थल नए साल के जश्न के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
जैसे-जैसे 31 दिसंबर नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे होटलों, होम-स्टे और रिसॉर्ट्स में बुकिंग का दबाव बढ़ता जा रहा है। शिमला, मनाली और धर्मशाला जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में होटल मालिकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरे खिले हुए हैं। पर्यटकों का कहना है कि पहाड़ों की ठंड, बर्फबारी का रोमांच, संगीत से सजी रातें और नए साल का पहला सवेरा किसी उत्सव से कम नहीं लगता। यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में युवा, परिवार और कपल्स पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश इस समय देश के सबसे व्यस्त पर्यटन राज्यों में शामिल हो गया है। मनाली पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लाहौल-स्पीति के शिकुला दर्रा क्षेत्र में भी बर्फ देखने के लिए सैलानी पहुंच रहे हैं। शिमला ट्रैक पर चलने वाली पांचों ट्रेनों की बुकिंग लगभग फुल हो चुकी है, वहीं दिल्ली, अमृतसर, जयपुर और देहरादून जैसे शहरों के लिए फ्लाइट टिकट मिलना मुश्किल होता जा रहा है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह साल के अंत का सबसे व्यस्त ट्रैवल सीजन है, जिसमें होटल, टैक्सी, गाइड और स्थानीय कारोबार सभी को बड़ा लाभ मिल रहा है।
धर्मशाला, डलहौजी और शिमला में विंटर कार्निवल की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रंग-बिरंगी रोशनी, स्थानीय संस्कृति की झलक, लोकनृत्य, संगीत कार्यक्रम और पारंपरिक व्यंजन इन आयोजनों की खास पहचान बन चुके हैं। मनाली और कसौली में न्यू ईयर पार्टियों का दौर पहले ही शुरू हो गया है। कई होटलों में लाइव म्यूजिक, डीजे नाइट और डिनर नाइट्स का आयोजन किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए खास पैकेज तैयार किए गए हैं, जिनमें ठहरने, खाने और मनोरंजन की सुविधाएं शामिल हैं।
नए साल का जश्न अब हर साल बदलते दौर का रिवाज बनता जा रहा है। पहले जहां लोग अपने शहरों में ही सीमित दायरे में नया साल मनाते थे, वहीं अब ट्रैवल और टूरिज्म नए साल के उत्सव का अहम हिस्सा बन चुका है। खासतौर पर ठंडे प्रदेशों में 30 और 31 दिसंबर की बुकिंग पहले से शुरू हो जाती है। एडवांस बुकिंग का फायदा यह है कि पर्यटकों को कमरे के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ती और वे आराम से अपने प्रवास का आनंद ले पाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन के बढ़ते दबाव को देखते हुए बड़ी संख्या में होम-स्टे खुले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश में करीब चार हजार से अधिक होम-स्टे पंजीकृत हुए हैं। इससे न सिर्फ पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिली है, बल्कि स्थानीय लोगों की आय के नए स्रोत भी खुले हैं। इस कारण अब कमरों की भारी किल्लत जैसी स्थिति नहीं बन रही है, हालांकि लोकप्रिय स्थानों पर अच्छे होटलों की बुकिंग जल्दी फुल हो जाती है।
किराये की बात करें तो शिमला में होटल का किराया एक हजार से लेकर दस हजार रुपये तक पहुंच चुका है। मनाली में यह रेंज बारह सौ रुपये से शुरू होकर दस हजार रुपये तक है। धर्मशाला में एक हजार से दस हजार, डलहौजी में एक हजार से आठ हजार और कसौली में बारह सौ से लेकर बारह हजार रुपये तक कमरे उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर आखिरी समय में कमरे मिलना मुश्किल हो रहा है। यह साफ संकेत है कि इस बार नए साल के जश्न के लिए पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ रही है।
मौसम का मिजाज भी इस समय पर्यटन के अनुकूल बना हुआ है। देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, वहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने सैलानियों का उत्साह और बढ़ा दिया है। बर्फ से ढके पहाड़, देवदार के जंगल और ठंडी हवाओं के बीच नए साल का स्वागत करना लोगों के लिए खास अनुभव बन रहा है। यही वजह है कि हिमालयी प्रदेशों में नए साल के जश्न का माहौल सबसे ज्यादा नजर आ रहा है।
हालांकि, इस जश्न के बीच जिम्मेदारी का संदेश भी जरूरी है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से युवाओं से अपील की जा रही है कि वे शराब और नशे से दूर रहकर सुरक्षित और सभ्य तरीके से नए साल का स्वागत करें। जश्न मनाना बुरा नहीं है, लेकिन बुरी आदतों से परहेज करना जरूरी है। कई पर्यटन स्थलों पर पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो और पर्यटक बेफिक्र होकर आनंद ले सकें।
नए साल का इंतजार कर रहे पर्यटक सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि सुकून और यादगार पलों की तलाश में भी हैं। पहाड़ों की शांति, ठंडी सुबह की धूप, स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी और प्रकृति के करीब बिताए गए पल उन्हें साल भर की भागदौड़ से राहत देते हैं। यही कारण है कि नए साल का जश्न अब केवल एक रात का उत्सव नहीं रह गया, बल्कि यह कुछ दिनों की छुट्टियों और अनुभवों का संगम बन चुका है।
कुल मिलाकर, देशभर में नए साल के स्वागत को लेकर जबरदस्त उत्साह है। पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की बढ़ती भीड़, होटल और ट्रांसपोर्ट की फुल बुकिंग और विंटर कार्निवल की रंगीन तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि 2026 का आगमन पूरे उल्लास और उमंग के साथ किया जा रहा है। जश्न जरूर मनाया जा रहा है, लेकिन उम्मीद यही है कि यह जश्न जिम्मेदारी, सुरक्षा और सकारात्मक सोच के साथ मनाया जाए, ताकि नया साल खुशियों और बेहतर भविष्य का संदेश लेकर आए।
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