संगठित अपराध और साइबर अपराध पर सख्त रुख के साथ उत्तरप्रदेश में नई पुलिसिंग की दिशा
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उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठित अपराध, साइबर क्राइम और महिलाओं की सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लखनऊ में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने इस संदेश को और मजबूत किया। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में प्रदेश की कानून व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई और भविष्य की पुलिसिंग के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। सम्मेलन का मूल उद्देश्य सुरक्षा, सुशासन और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन की बुनियाद मजबूत कानून व्यवस्था पर ही टिकी होती है। यदि कानून व्यवस्था कमजोर होगी तो विकास, निवेश और सामाजिक सौहार्द सभी प्रभावित होंगे। इसी सोच के तहत उत्तरप्रदेश सरकार ने बीते वर्षों में पुलिसिंग की धारणा को बदलने का प्रयास किया है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष तकनीक और प्रशासनिक नवाचारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तुतिकरण दिए गए। आधुनिक तकनीक के उपयोग से अपराध नियंत्रण, अपराधियों की पहचान और त्वरित कार्रवाई को कैसे और प्रभावी बनाया जा सकता है, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल निगरानी, साइबर फॉरेंसिक और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि साइबर क्राइम आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इससे निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम और सतर्क होना होगा।
महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तरप्रदेश में महिला सुरक्षा के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनमें महिला हेल्पलाइन, एंटी रोमियो स्क्वॉड और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण प्रदेश में महिलाओं में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिला अपराधों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। सम्मेलन में संगठित अपराध पर भी विशेष फोकस रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठित अपराध न केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाता है। ऐसे अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति को और सख्ती से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि माफिया, गिरोहबंद अपराधियों और अवैध नेटवर्क के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जाए। बीते वर्षों में माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
साइबर अपराध के साथ-साथ साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने पर भी सम्मेलन में गंभीर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरप्रदेश विविधताओं वाला प्रदेश है और यहां शांति एवं सौहार्द बनाए रखना पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की अफवाह, उकसावे या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में तटस्थता और निष्पक्षता सबसे जरूरी है, ताकि जनता का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर बना रहे।
त्वरित न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अहम बातें रखीं। उन्होंने कहा कि अपराध पर नियंत्रण तभी प्रभावी होगा, जब अपराधियों को समयबद्ध सजा मिले। इसके लिए पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। जांच की गुणवत्ता, साक्ष्यों का मजबूत संकलन और अदालत में प्रभावी पैरवी से ही दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
सम्मेलन में यह भी स्वीकार किया गया कि कानून व्यवस्था को लेकर चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। तकनीक के विकास के साथ अपराध के तरीके भी आधुनिक होते जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव लाना होगा। भविष्य की पुलिसिंग के लिए डेटा आधारित निर्णय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और अन्य आधुनिक संसाधनों के उपयोग पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक को मानव संवेदनशीलता के साथ जोड़कर ही प्रभावी पुलिसिंग संभव है।
योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि जनता में सुरक्षा का भाव और अधिक मजबूत किया जाए। पुलिस का व्यवहार, उसकी तत्परता और जवाबदेही सीधे तौर पर जनता के विश्वास से जुड़ी होती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे जनता के साथ संवाद बढ़ाएं, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समय पर समाधान सुनिश्चित करें। इससे न केवल अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि समाज में सकारात्मक माहौल भी बनेगा।
उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था में हुए ठोस सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकार या पुलिस की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे इस उपलब्धि को बनाए रखने के साथ-साथ और बेहतर करने की दिशा में काम करें। सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति बनी कि प्रभावी रोडमैप तैयार कर उसके क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि रणनीति कागजों तक सीमित न रहे।
कुल मिलाकर यह पुलिस सम्मेलन उत्तरप्रदेश में भविष्य की पुलिसिंग की दिशा तय करने वाला साबित हुआ। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा, साम्प्रदायिक सौहार्द और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया जैसे विषयों पर केंद्रित यह मंथन इस बात का संकेत है कि सरकार कानून व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत कानून व्यवस्था ही सुशासन की पहचान है और इसी आधार पर प्रदेश को सुरक्षित, शांत और विकासोन्मुख बनाने का संकल्प लिया गया है।
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