वीर बाल दिवस से विकसित भारत की ओर बढ़ता आत्मविश्वासी युवा
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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार और वीर बाल दिवस का यह अवसर केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत के भविष्य की स्पष्ट झलक भी था। जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए 20 प्रतिभाशाली बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इन बच्चों से संवाद किया, तो यह संदेश पूरे देश में गया कि आज का भारत अपने युवाओं और बच्चों को केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति मानता है। यह कार्यक्रम उस सोच का प्रतीक बना, जिसमें प्रतिभा, साहस, सेवा और समर्पण को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद माना गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए जिस विश्वास के साथ कहा कि जेन ज़ी और जेन अल्फा ही विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेंगे, वह केवल भाषण नहीं बल्कि बीते एक दशक की नीतियों और प्रयासों का आत्मविश्वास था। आज भारत स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल तकनीक, खेल, विज्ञान, सामाजिक सेवा और संस्कृति के क्षेत्र में जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक बन चुकी है। प्रधानमंत्री ने बच्चों को बड़े सपने देखने, निरंतर मेहनत करने और आत्मविश्वास को कभी कमजोर न पड़ने देने की प्रेरणा देकर यह स्पष्ट किया कि सरकार का भरोसा पूरी तरह युवा पीढ़ी पर है।
इस अवसर पर मौजूद विविध पृष्ठभूमि से आए बच्चे भारत की बहुआयामी प्रतिभा का जीवंत उदाहरण थे। 14 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की उपस्थिति ने खेल जगत में उभरती नई ऊर्जा को रेखांकित किया, वहीं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चाय और नाश्ता देकर मानवता और सेवा का उदाहरण पेश करने वाले फिरोजपुर के श्रवण सिंह ने यह साबित किया कि राष्ट्र सेवा के लिए उम्र या साधनों की सीमा नहीं होती। तमिलनाडु की ब्योमा और बिहार के कमलेश कुमार को मिला सम्मान इस बात का प्रमाण है कि भारत का हर कोना प्रतिभा से भरा हुआ है और सरकार उसे खोजने और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और पहले की तुलना में अवसर कहीं अधिक हैं। यह कथन केवल आंकड़ों पर आधारित नहीं, बल्कि उस बदले हुए माहौल का प्रतिबिंब है जिसमें युवा अब सपने देखने से डरते नहीं हैं। कभी यह धारणा बना दी गई थी कि कुछ अच्छा हो ही नहीं सकता, लेकिन वर्तमान सरकार ने उस मानसिकता को बदलने का काम किया है। आज जब कोई युवा आगे बढ़ता है, तो उसके साथ 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति खड़ी होती है। सीखने के संसाधन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अवसर युवाओं को नई उड़ान दे रहे हैं।
वीर बाल दिवस का भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व इस कार्यक्रम को और भी गहन बना देता है। गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों, अजित सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत को स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटी उम्र में भी किस तरह वे अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध अडिग खड़े रहे। 26 दिसंबर 1705 को मुगल सेना द्वारा चारों साहिबजादों की हत्या भारतीय इतिहास का वह अध्याय है, जो साहस, बलिदान और धर्म की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 में इसी दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह कदम केवल स्मरण का नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
प्रधानमंत्री के संवाद में यह स्पष्ट दिखा कि सरकार युवाओं को केवल चमक-दमक तक सीमित नहीं देखना चाहती, बल्कि उन्हें देश की प्रतिभा और टैलेंट के रूप में आगे बढ़ते देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश प्रतिभा को खोजता है, उसे संवारता है और आगे बढ़ने का अवसर देता है। गुजरात की सात साल की बच्ची को ग्रैंडमास्टर बनने पर बाल पुरस्कार मिलना, झारखंड की फुटबॉलर को राष्ट्रीय सम्मान मिलना और सामाजिक सेवा में योगदान देने वाले वंश को सम्मानित किया जाना यह दर्शाता है कि भारत हर क्षेत्र में अपने नायकों को पहचान रहा है। नौ साल की एस्तेर, जिनके यूट्यूब पर 20 मिलियन फॉलोअर्स हैं, यह बताती हैं कि डिजिटल युग में भारतीय बच्चे वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के साथ मिलने वाला मेडल, प्रमाण पत्र और एक लाख रुपये तक का नकद इनाम केवल प्रोत्साहन नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि सरकार प्रतिभा का सम्मान करती है और उसे आगे बढ़ने के लिए ठोस समर्थन भी देती है। यह सम्मान बच्चों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देता है और समाज को यह सिखाता है कि सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में भारतीय भाषाओं में हुए लगभग 160 भाषणों का उल्लेख करते हुए गुलामी की मानसिकता पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के बाद भी लंबे समय तक ऐसी सोच हावी रही, लेकिन आज भारत अपनी भाषाओं, संस्कृति और पहचान पर गर्व कर रहा है। यह आत्मगौरव भी युवाओं के भीतर नई ऊर्जा भरता है और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
इस पूरे कार्यक्रम में मोदी सरकार की युवा-केंद्रित सोच स्पष्ट रूप से दिखाई दी। शिक्षा सुधार, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, खेलों में प्रोत्साहन, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने युवाओं को अवसरों से जोड़ा है। प्रधानमंत्री का यह विश्वास कि युवाओं की सफलता ही देश की सफलता बने, केवल नारा नहीं बल्कि कार्यनीति है। जब युवा आगे बढ़ता है, तो राष्ट्र स्वतः आगे बढ़ता है।
अंततः प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार और वीर बाल दिवस का यह आयोजन भारत के भविष्य की मजबूत नींव का प्रतीक बन गया। यहां सम्मानित बच्चे केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के नायक नहीं हैं, बल्कि वे उस भारत का चेहरा हैं जो आत्मविश्वास, साहस और संकल्प के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और वर्तमान सरकार की यही सबसे बड़ी उपलब्धि है कि उन्होंने युवाओं को हाशिये से उठाकर राष्ट्र निर्माण के केंद्र में खड़ा कर दिया है। आज का भारत अपने बच्चों और युवाओं पर गर्व करता है, उन पर भरोसा करता है और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर भविष्य की ओर अग्रसर है।
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