हर बरस गरीब व मध्यमवर्ग पर ही अतिक्रमण की मार क्यों?
अतिक्रमण किसी भी महानगर, नगर या गाँव के विकास एवं सौंदर्यीकरण में एक बड़ी बाधा है । यह गैरकानूनी भी है और इसका किसी भी रूप में समर्थन करना सरकार की शहरों और गाँवों के विकास की योजनाओं को आघात पहुँचाने जैसा है । परंतु बार-बार यह प्रश्न उठता है कि देश के महानगरों और शहरों में हर वर्ष नगर निगम एवं नगर पालिकाओं को अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? हर साल हजारों-लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद अतिक्रमण समाप्त क्यों नहीं हो पाता हे ?
देशभर की राज्य सरकारों को चाहिए कि वे बढ़ते अतिक्रमण पर गंभीर मंथन कर ऐसी ठोस और व्यापक योजना बनाएँ, जिससे हर वर्ष अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाने की आवश्यकता ही न पड़े। साथ ही, गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के रोजगार हेतु शहरों में निश्चित एवं सर्व-सुविधायुक्त स्थान उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें । उम्मीद है कि राज्य सरकारें और जिला प्रशासन केवल गरीबों पर कार्रवाई करने के बजाय समान रूप से सभी अवैध अतिक्रमणों पर निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे और इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे।


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