सफदरजंग अस्पताल में पहली बार सफल बाल चिकित्सा किडनी प्रत्यारोपण, केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में भी पहला मामला

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स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता 
 
नई दिल्ली। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने अपने रीनल ट्रांसप्लांट कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 19 नवंबर 2025 को अस्पताल में सफलतापूर्वक बाल चिकित्सा किडनी प्रत्यारोपण (Paediatric Renal Transplant) किया गया। अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि यह न सिर्फ सफदरजंग अस्पताल में पहली बार हुआ है, बल्कि किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में किया गया पहला बाल चिकित्सा किडनी प्रत्यारोपण है सर्जिकल टीम का नेतृत्व यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के निदेशक प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. पवन वासुदेवा ने किया, जिनके साथ डॉ. नीरज कुमार प्रोफेसर, यूरोलॉजी शामिल रहे।
 
बाल चिकित्सा टीम का नेतृत्व बाल गुर्दा रोग विभाग की निदेशक प्रोफेसर एवं इंचार्ज डॉ.श्रीमती शोभा शर्मा ने किया। टीम में डॉ. श्रीनिवासवरदन (असिस्टेंट प्रोफेसर) और प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग के डॉ. प्रदीप के देबता के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुशील ने किया, टीम में डॉ. ममता और डॉ. सोनाली शामिल रहीं, यह सभी एनेस्थीसिया विभाग की निदेशक प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कविता रानी शर्मा के मार्गदर्शन में कार्यरत थे मरीज 11 वर्षीय बालक था, जिसे 'बाइलेटरल हाइपोडिस्प्लास्टिक किडनी' नामक दुर्लभ बीमारी के कारण अंतिम चरण की किडनी विफलता हो गई थी।
 
डॉ. शोभा शर्मा ने बताया कि लगभग डेढ़ साल पहले बच्चा बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और उसे कार्डियक अरेस्ट के बाद पुनर्जीवित करना पड़ा। उसी समय किडनी फेल होने का पता चला और तब से बच्चा बाल नेफ्रोलॉजी विभाग की देखरेख में नियमित डायलिसिस पर था।डॉ. पवन वासुदेवा ने बताया कि बाल चिकित्सा किडनी प्रत्यारोपण अत्यंत जटिल सर्जरी होती है, क्योंकि इसमें दाता की किडनी को बच्चे की बड़ी रक्त वाहिकाओं से जोड़ना और उसके शरीर में वयस्क किडनी के लिए पर्याप्त स्थान बनाना चुनौतीपूर्ण होता है।
 
इस मामले में दाता बच्चे की 35 वर्षीय माता थीं। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि प्रत्यारोपित किडनी ने ठीक प्रकार से कार्य करना शुरू कर दिया है, बच्चा डायलिसिस से मुक्त हो चुका है और उसकी स्थिति सामान्य है तथा वह शीघ्र ही अस्पताल से छुट्टी पा लेगा। उन्होंने निदेशक डॉ. संदीप बंसल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बंबा और प्राचार्य डॉ. गीति‍का खन्ना के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
 
निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल सभी नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) से आने वाले इस बच्चे के परिवार ने आर्थिक तंगी के कारण आशा खो दी थी, क्योंकि निजी क्षेत्र में ऐसा ऑपरेशन लगभग 15 लाख रुपये का होता। उन्होंने यह प्रसन्नता जताई कि बच्चा अब स्वस्थ है और नए जीवन की शुरुआत कर रहा है।
 
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बंबा ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद जीवनभर उपयोग होने वाली महंगी 'इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं' भी अस्पताल की ओर से बच्चे को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।यह उपलब्धि न केवल सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा क्षमता का प्रमाण है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो आर्थिक तंगी के चलते जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं का लाभ नहीं उठा पाते।

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