डीएम एवं सीडीओ के मार्गदर्शन में अमेठी के किसानों ने की नवाचार खेती की मिसाल पेश

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिली प्रेरणा — संकर लौकी की खेती से बढ़ी आमदनी

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पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना से जल संरक्षण और उत्पादन में हुआ दोगुना लाभ

अमेठी। जिला प्रशासन अमेठी द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एवं पर ड्रॉप मोर क्रॉप माइक्रो इरीगेशन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप जिले के कृषक अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नवाचार एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपना रहे हैं।डीएम संजय चौहान एवं सीडीओ  सचिन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में सतत कृषि विकास, जल संरक्षण एवं कृषक आय वृद्धि के लिए योजनाओं का सफलतापूर्वक विस्तार किया जा रहा है।ग्राम जंगलरामनगर, विकासखंड अमेठी के कृषक बैजनाथ मौर्या ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सहयोग से 0.50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मचान लगाकर संकर लौकी की खेती प्रारंभ की।
 
कृषक ने आधुनिक तकनीक अपनाते हुए “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के अंतर्गत ड्रिप इरीगेशन प्रणाली स्थापित की, जिससे जल का कुशल उपयोग संभव हुआ। परिणामस्वरूप कृषक को जायद मौसम में लगभग 200 क्विंटल लौकी का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे आय में उल्लेखनीय वृद्धि, मुख्य फसल के साथ ही मौर्या ने खेत में भिंडी, धनिया, मूली की इंटरक्रॉपिंग कर भूमि के अधिकतम उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त रबी मौसम में उन्होंने टमाटर, बैंगन, फूलगोभी एवं पत्तागोभी की खेती कर लगभग 3.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
 
कृषक की इस उपलब्धि ने न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई। कृषि विकास योजना (RKVY) का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों, उन्नत बीजों, सिंचाई तकनीकों और फसल विविधीकरण के माध्यम से अधिकतम उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, यंत्र सहायता, वित्तीय सहयोग एवं फसल प्रबंधन से संबंधित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।जिलाधिकारी संजय चौहान ने कहा कि “जनपद अमेठी में कृषि क्षेत्र की संभावनाएँ असीम हैं।
 
योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं।उन्होंने बताया कि जल संरक्षण, फसल विविधीकरण एवं तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन निरंतर प्रयासरत है।मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह ने कहा कि  बैजनाथ मौर्या जैसे किसान यह सिद्ध कर रहे हैं कि यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन और मार्गदर्शन मिले, तो छोटे किसान भी बड़े बदलाव के वाहक बन सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रशासन का उद्देश्य
किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें “वोकल फॉर लोकल” एवं “आत्मनिर्भर भारत” की भावना से जोड़ना है।
 
जिला उद्यान अधिकारी अमेठी ने बताया कि जनपद में टिश्यू कल्चर केले, ड्रिप इरीगेशन, सब्ज़ी उत्पादन एवं जैविक खेती जैसी नवाचार विधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।इन पहलों के माध्यम से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं और कृषि से जुड़े अन्य रोजगारों को भी सशक्त कर रहे हैं।
 

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