भारत–तालिबान संपर्क से पाकिस्तान पर दबाव, अफगान सीमा पर बढ़ा तनाव

भारत–तालिबान संपर्क से पाकिस्तान पर दबाव, अफगान सीमा पर बढ़ा तनाव

International Desk

काबुल/इस्लामाबाद | 4 नवंबर 2025 — दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में बड़ा मोड़ आया है। भारत और अफगानिस्तान (तालिबान शासन) के बीच हालिया उच्च-स्तरीय बातचीत ने पाकिस्तान को नई कूटनीतिक चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच हुई फोन वार्ता को दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय माना जा रहा है।

भारत का तालिबान से सीधा संवाद

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ने अफगानिस्तान में हाल में आए मज़ार-ए-शरीफ़ भूकंप के बाद तत्काल मानवीय सहायता की पेशकश की। डॉ. जयशंकर ने मुत्ताकी से बातचीत में कहा कि भारत “हर कठिन परिस्थिति में अफगान जनता के साथ खड़ा रहेगा।” यह पहली बार है जब किसी भारतीय विदेश मंत्री ने तालिबान शासन के वरिष्ठ अधिकारी से सार्वजनिक रूप से संवाद किया है।

अफगान विदेश मंत्रालय ने भी भारत के कदम की सराहना करते हुए कहा कि “भारत क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण भागीदार है।” सोशल मीडिया पर अफगान नागरिकों ने भी भारत के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

गौरसन्स पर अवैध वसूली के आरोप तेज, खरीदारों ने YEIDA से की तुरंत कार्रवाई की मांग Read More गौरसन्स पर अवैध वसूली के आरोप तेज, खरीदारों ने YEIDA से की तुरंत कार्रवाई की मांग

पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव

दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार को दो मोर्चों पर दबाव झेलना पड़ रहा है।

  1. अफगान सीमा पर झड़पें: ताजा सप्ताहों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी और तनाव की खबरें आई हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

  2. अफगान शरणार्थियों का निष्कासन: पाकिस्तान ने अपने देश से हजारों अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजना शुरू किया, जिससे काबुल और इस्लामाबाद के बीच तनाव और बढ़ गया है। तालिबान सरकार ने इस पर “गंभीर चिंता” जताई है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत-अफगान संपर्क से पाकिस्तान “रणनीतिक रूप से घिरा” महसूस कर सकता है। नई दिल्ली अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को मानवीय सहयोग और सुरक्षा नीति दोनों स्तर पर मजबूत कर रही है।

भारत की त्रिशूल मिलिट्री एक्सरसाइज

इसी बीच, भारतीय सशस्त्र बलों ने राजस्थान और गुजरात सेक्टर में ‘त्रिशूल’ संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह नियमित ट्राई-सर्विस ड्रिल है, लेकिन क्षेत्रीय घटनाक्रम के बीच इसे “संदेश-वाहक” कदम के रूप में देखा जा रहा है।

रणनीतिक तस्वीर

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह कदम यथार्थवादी कूटनीति की दिशा में है — यानी तालिबान शासन को मान्यता दिए बिना अफगान जनता से जुड़ाव बनाए रखना। यह नीति पाकिस्तान के पारंपरिक प्रभाव को सीमित कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. आर.के. शर्मा कहते हैं —

“भारत अब अफगानिस्तान को लेकर भावनात्मक नहीं, रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहा है। पाकिस्तान के लिए यह संकेत है कि क्षेत्र में अब ‘एकतरफा प्रभाव’ का दौर खत्म हो रहा है।”

About The Author

स्वतंत्र प्रभात मीडिया परिवार को आपके सहयोग की आवश्यकता है ।

Post Comment

Comment List

आपका शहर

अंतर्राष्ट्रीय

Online Channel