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किसानों की आवाज़ को बुलंद करने का संकल्प, बेतिया में अतुल कुमार अंजान को भावभीनी श्रद्धांजलि,
आंदोलन तेज करने का ऐलान।
बेतिया। पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित बलिराम भवन के सभागार में बिहार राज्य किसान सभा, पश्चिम चंपारण इकाई की ओर से एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव रहे स्वर्गीय अतुल कुमार अंजान की पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान नेताओं, कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भाग लिया।.
कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय अतुल कुमार अंजान के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनके योगदान को नमन किया और किसान आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने अतुल कुमार अंजान के विचारों और उनके संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। नेताओं ने कहा कि उन्होंने जीवनभर किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हक की लड़ाई लड़ी और उनके अधिकारों के लिए लगातार आवाज़ उठाई। उनके सिद्धांत आज भी किसान आंदोलन के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि स्वर्गीय अंजान के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए किसान सभा और अधिक मजबूती के साथ काम करेगी। किसानों की समस्याओं जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्ज़ मुक्ति, सिंचाई, बीज और खाद की उपलब्धता को लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान भाकपा के जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने कहा कि आज के समय में किसानों की स्थिति चिंताजनक है और ऐसे में अतुल कुमार अंजान के विचारों को अपनाकर ही संघर्ष को दिशा दी जा सकती है। किसान नेता राधामोहन यादव और अशोक मिश्र ने भी किसानों की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक जारी रहेगी। कार्यक्रम में कृष्ण नंदन सिंह, केदार चौधरी, संजय सिंह, अंजारूल, चन्द्रिका प्रसाद, खेत मजदूर नेता राजेन्द्र साह, युवा नेता इदू मियाँ, एटक नेता लालबाबू राम सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और किसान आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया।
महिला भागीदारी भी इस कार्यक्रम की विशेषता रही। शारदा देवी, मालती देवी, रंग देवी, शीला देवी और चंदा देवी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए किसानों के संघर्ष में महिलाओं की भूमिका को अहम बताया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान एक स्वर में यह बात सामने आई कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए अब संघर्ष को और व्यापक और तेज करने की जरूरत है। अंत में सभी ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे अतुल कुमार अंजान के बताए रास्ते पर चलते हुए किसानों की लड़ाई को और मजबूती देंगे।
यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ किसान आंदोलन को आगे बढ़ाने का संदेश भी दे गया।


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