सिद्धार्थनगर में पानी की टंकी पर 16 घंटे से फंसे 2 बच्चों को एयरफोर्स हेलिकॉप्टर से सेना ने किया रेस्क्यू
रील बनाने पानी की टंकी पर चढ़े थे,सीढ़ी टूटने से 3 नीचे गिरे, एक की मौत, दो घायल
हरीश कुमार चौधरी
सिद्धार्थनगर। शहर के कांशीराम आवास कॉलोनी में शनिवार को 5 बच्चे रील बनाने के लिए 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़े थे। उतरते समय सीढ़ी टूट गई। 3 बच्चे नीचे गिर गए। इनमें से 1 की मौत हो गई, जबकि 2 की हालत गंभीर है। 2 बच्चे टंकी पर फंस गए। पानी की टंकी पर 16 घंटे से फंसे बच्चों का एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर से सेना ने रेस्क्यू किया। दोनों को गोरखपुर के एयरफोर्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। टंकी के आसपास दलदल होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आई। हाइड्रॉलिक क्रेन मंगाई गई, लेकिन दलदल के कारण क्रेन टंकी तक नहीं पहुंच पाई। इसलिए 150 मीटर सड़क बनाने का काम शुरू किया गया। देर रात तक करीब 120 मीटर तक सड़क बन गई।

इस बीच, रात करीब 3 बजे तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे काम रोकना पड़ा। हालात देखते हुए प्रशासन ने सेना की मदद मांगी। इसके बाद रविवार सुबह करीब 5.20 बजे एयरफोर्स का हेलिकॉप्टर घटनास्थल पर पहुंचा दोनों बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया। जबकि शनिवार को ही चिकित्सकों ने 13 वर्षीय सिद्धार्थ पुत्र धर्मेंद्र को मृत घोषित कर दिया। वह मोहाना थाना क्षेत्र के जुबलीपुर का निवासी था और काशीराम कॉलोनी में अपने रिश्तेदार के यहां आया हुआ था। घायल किशोरों में 11 वर्षीय शनि पुत्र बरसाती और 14 वर्षीय गोलू पुत्र चंद्रेश शामिल हैं ।
दोनों के सीने में गंभीर चोटें आई हैं और उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। वहीं, 16 वर्षीय पवन पुत्र मिथलेश और 14 वर्षीय पुत्र जमीरुद्दीन टंकी के ऊपर एक साथ आवास के पास ही जर्जर पानी की टंकी पर रील बनाने के लिए चढ़ गए थे। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। सूचना के बाद मौके पर डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी अभिषेक महाजन समेत कई अफसर पहुंचे।राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। मौके पर पोकलेन बुलाकर मलबा हटाया गया। बच्चों तक रस्सी के जरिए खाना और पानी पहुंचाया गया।
पानी की टंकी के चारों तरफ पानी भरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए गोरखपुर से हाइड्रॉलिक प्लेटफॉर्म क्रेन मंगाई गई। इसमें लिफ्ट लगी होती है, जो सीढ़ी के जरिए 135 फीट ऊंचाई तक जाती है। पहले हाइड्रॉलिक क्रेन का मेन सड़क पर ट्रायल किया गया। इस दौरान उसके लिफ्ट सेंसर में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद लखनऊ से क्रेन मंगाई गई। दूरी ज्यादा होने की वजह से देर होने लगी तो बचाव का अन्य रास्ता तलाशा गया।
इसके बाद सड़क बनाकर टंकी तक पहुंचने का रास्ता अपनाया गया। जल्द ही 150 मीटर तक सड़क बनाने का काम शुरू किया गया। तीन जेसीबी और एक पोकलेन की मदद से देर रात तक 120 मीटर सड़क तैयार कर ली गई। फिर मौसम खराब हो गया। इसके बाद वायुसेना की मदद मांगी गई। एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर से पानी के टंकी पर फंसे 2 बच्चों को सेना ने रेस्क्यू कर गोरखपुर ले गए।
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