जस्टिस शेखर यादव कल होंगे रिटायर, महाभियोग प्रस्ताव होगा खत्म

इलाहाबाद हाईकोर्ट में फुल कोर्ट रेफरेंस,बयानों से विवादों में रहे

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ब्यूरो प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस शेखर कुमार यादव बुधवार (15 अप्रैल) को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जबकि उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पिछले एक साल से अधिक समय से लंबित है। उनके रिटायर होने पर अब महाभियोग का प्रस्ताव निरर्थक (बेकार) हो जाएगा। जस्टिस यादव ने 12 दिसंबर 2019 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 26 मार्च 2021 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।

आपत्तिजनक शब्दों की खूब आलोचना हुई
8 दिसंबर 2024 को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद के विधिक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में "समान नागरिक संहिता की संवैधानिक आवश्यकता" विषय पर व्याख्यान देते हुए जस्टिस यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक समाज की इच्छाओं के अनुसार चलेगा। इस दौरान उन्होंने एक आपत्तिजनक शब्द का भी प्रयोग किया, जिसकी व्यापक आलोचना हुई। इस भाषण पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यादव से स्पष्टीकरण मांगा था। यही नहीं उनसे कहा गया था कि आप खेद प्रकट कर दीजिए, परंतु उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया था और कहा था कि उन्होंने ऐसा कुछ भी गलत नहीं बोला है।

13 दिसंबर को महाभियोग प्रस्ताव
इसके बाद 13 दिसंबर 2024 को उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के महासचिव को सौंपा गया, जिस पर 55 सांसदों के हस्ताक्षर थे, जो आवश्यक 50 सांसदों की संख्या से अधिक है। हालांकि यह महाभियोग प्रस्ताव अभी भी राज्यसभा में लंबित है, लेकिन इससे पहले ही जस्टिस यादव सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के अवसर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित गया है। फुल कोर्ट रेफरेंस बुधवार को चीफ जस्टिस की कोर्ट में अपराह्न 3.45 पर रखा गया है।  इसमें हाईकोर्ट के सभी जजों के अलावा बार एसोसिएशन के अधिवक्ता सदस्य तथा हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारी शामिल होंगे। हाईकोर्ट की तरफ से सभी को शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है।

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